नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट पेश करने के लिए वित्तमंत्री जब संसद में आती हैं तो उनके हाथ में लाल रंग का बहीखाता होता है, इस बहीखाते में वो टैब होता है जिससे वित्तमंत्री बजट भाषण पढ़ती हैं। पहले के समय में वित्त मंत्री पेपर से बजट पढ़ा करते थे, तब बजट डॉक्यूमेंट बहीखाते में रखे जाते थे। साल 2019 तक वित्त मंत्री ब्रीफकेस लेकर आते थे, हालांकि उसके बाद ब्रीफकेस की जगह बहीखाते ने ले ली है।
क्या है बही खाते का महत्व
बजट के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला लाल रंग का बही-खाता, जिसने 2019 में पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह ले ली है। वित्त मंत्री सीतारमण इस थैली में अपना आईपैड रखती हैं, जिससे वह बजट भाषण पढ़ती हैं और परंपरा को बनाए रखते हुए तकनीक को अपनाती हैं। लेकिन यह ब्रीफकेस हमेशा लाल रंग का ही क्यों होता है? दरअसल, डिजिटाइजेशन से पहले बिजनेस करने वाले ज्यादातर लोग बहीखाते में पूरा हिसाब-किताब लिखा करते थे, ये बही खाता लाल रंग का होता था। अभी भी कई दुकानदार बहीखाते में ही हिसाब करते हैं। इसी के प्रतीक के तौर पर वित्त मंत्री बहीखाते में बजट डॉक्यूमेंट लेकर आती हैं।
क्यों ब्रीफकेस की जगह बहीखाते को अपनाया गया?
आज़ादी के बाद भारत के पहले वित्त मंत्री आरके शंखमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 को आज़ाद भारत का पहला बजट पेश किया था। तब वो एक ब्रीफकेस में बजट डॉक्यूमेंट्स लेकर पहुंचे थे। ये ब्रीफकेस ग्लैडस्टोन बॉक्स की कॉपी थी। ब्रिटेन के वित्त मंत्री का बजट भाषण ग्लैडस्टोन बॉक्स में ही रखा जाता था। आज़ादी के बाद साल 2019 से पहले तक भारत में भी ब्रीफकेस की परंपरा जारी रही। वित्त मंत्री ब्रीफकेस लेकर संसद पहुंचते और मीडिया के सामने उस ब्रीफकेस को पेश करते, यह नए बजट का संकेत होता था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2019 में ब्रीफकेस को बही खाते से रिप्लेस किया। उनका कहना था कि ये औपनिवेशिक व्यवस्था को बदलने के लिए एक जरूरी कदम है।





