नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें भीड़ से दूर, पहाड़ों की खामोशी और प्रकृति की गोद में खो जाने का शौक है, तो भारत की ये पाँच छुपी हुई डेस्टिनेशन आपकी बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। यहाँ न सिर्फ मन को शांति मिलेगी, बल्कि हर मोड़ पर ऐसे नज़ारे दिखेंगे जो जिंदगीभर याद रहेंगे।
1. जीरो वैली, अरुणाचल प्रदेश बादलों, धान के खेतों और बाँस के घरों की जन्नत
पूर्वोत्तर भारत की गोद में बसी जीरो वैली कहीं न कहीं वक़्त को थाम लेने जैसा एहसास कराती है। पाइन के जंगल, धान के लहलहाते खेत और बांस से बने पारंपरिक घरसब मिलकर इसे धरती का स्वर्ग बनाते हैं।
ढलते सूरज के बीच जब घाटी सुनहरी रोशनी में नहाती है, तो ये नज़ारा सीधे दिल में उतर जाता है।
कब जाएँ: मार्च–अक्टूबर (और सितंबर में यहां का मशहूर जीरो म्यूजिक फेस्टिवल)
कैसे पहुंचे: असम का लीलाबाड़ी एयरपोर्ट सबसे नज़दीक, वहां से 130 किमी टैक्सी उपलब्ध।
2. गुरेज वैली, जम्मू-कश्मीर — कश्मीर की सबसे शांत और दिव्य घाटी
श्रीनगर से करीब 128 किमी दूर गुरेज वैली उन यात्रियों के लिए उपहार है जो कश्मीर की असली शांति तलाशते हैं।बर्फ से ढकी चोटियाँ, नीली नदी और पाक-साफ हवायहां की हर सुबह दिल को नया सुकून देती है। यह घाटी आज भी भीड़भाड़ से दूर है, इसलिए असल कश्मीर का रंग यहां महसूस होता है।कब जाएं,मई–सितंबर सर्दियों में बर्फबारी रास्ते बंद कर देती है।
3. मॉवलिन्नांग, मेघालय — एशिया का सबसे साफ-सुथरा गांव
मेघालय के इस छोटे से गांव को एशिया का सबसे क्लीन विलेज कहा जाता है। यहां के रास्ते फूलों से सजे हैं, पेड़ों की जड़ों से बना लिविंग रूट ब्रिज किसी जादुई दुनिया जैसा लगता है। हर घर, हर गली सब इतनी सलीके से सजाए गए हैं कि लगता है मानो कोई खूबसूरत पेंटिंग ज़िंदा हो उठी हो।कब जाएं,अक्टूबर–अप्रैल महीने में।
4. माजुली आईलैंड, असम — ब्रह्मपुत्र की गोद में दुनिया का सबसे बड़ा नदी-द्वीप
ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बना माजुली सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि संस्कृति और शांति का संगम है। यहां की हरियाली, नदी की ठंडी हवा और असमिया संस्कृति का रंग किसी भी यात्री को रोक लेता है।नवंबर से मार्च तक यहाँ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जो माजुली को और भी खास बना देते हैं।कैसे पहुंचें:जोरहट तक ट्रेन/फ्लाइट, निमाती घाट, वहां से फेरी से माजुली।
5. छितकुल, हिमाचल प्रदेश — भारत-तिब्बत मार्ग का अंतिम बसेरा
हिमाचल का यह शांत गांव 11,319 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।बसपा नदी इसके बीच से बहती है और घाटी में ऐसी ताजगी भरती है कि यहां बैठे घंटों बीत जाएं। यह भारत की तरफ़ से हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग पर अंतिम बसा गांव है। भीड़ से बिल्कुल दूर, शांति और खूबसूरती से भरपूर। यहां आप अप्रैल, अक्टूबर महीने में घूम सकते है।
कैसे पहुंचें: शिमला सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट, वहां से करीब 300 किमी दूरी पर सांगला होते हुए छितकुल पहुँचा जा सकता है।अगर आप सच में प्रकृति से जुड़ना चाहते हैं, शहरों की भागदौड़ से दूर किसी शांत कोने में खुद से बात करना चाहते हैं, तो ये पाँच डेस्टिनेशन आपके लिए परफेक्ट हैं।





