नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज घोषणा की कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे 5.50% पर स्थिर रखा गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब लगातार तीन बार ब्याज दरों में कटौती की गई थी, जिससे लोगों को होम लोन, कार लोन आदि में राहत मिली थी। हालांकि, इस बार आम जनता की उम्मीदों को विराम मिला है।
इस साल की कटौतियों की पूरी लिस्ट
फरवरी 2025, 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती (रेपो रेट 6.25%) अप्रैल 2025 फिर से 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती जून 2025 अप्रत्याशित रूप से 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती (रेपो रेट घटकर 5.50%) गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “महंगाई में फिर से तेजी आने के संकेत हैं। ऐसे में हमें सतर्क रहना होगा। साथ ही अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक चर्चाएं भी जारी हैं, जिनका असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तस्वीर साफ नहीं होती, आरबीआई जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा।
क्या है रेपो रेट और इसका असर?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट कम होता है, तो बैंक सस्ते ब्याज पर लोगों को लोन दे सकते हैं। इससे EMI में राहत मिलती है, और बाजार में पैसे की गति तेज होती है। वहीं, रेपो रेट में बढ़ोतरी या स्थिरता से लोन महंगे या उसी स्तर पर बने रहते हैं। इस बार की एमपीसी बैठक में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को यथावत रखने का निर्णय लिया। यह दिखाता है कि फिलहाल आरबीआई की प्राथमिकता मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना है, न कि लोन सस्ता करना। RBI के अनुसार अगर महंगाई काबू में रहती है और वैश्विक व्यापार स्थितियां स्थिर होती हैं, तो आगामी बैठकों में फिर से कटौती हो सकती है। फिलहाल, बैंक से लोन लेने वालों और घर खरीदने वालों को थोड़ी और प्रतीक्षा करनी होगी। रेपो रेट में बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को इस बार निराशा हाथ लगी है।




