नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त हो चुका है। 20 दिन चला ये सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। शुरुआत में अडानी और जॉर्ज सोरोस के नाम पर हंगामा चलता रहा और बाद के कुछ दिन डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के नाम पर हंगामा हुआ। यह जानना बेहद जरूरी है कि पूरे शीतकालीन सत्र में कितने विधेयक पारित हुए और कितने सार्वजनिक मुद्दों पर बहस हुई।
आंबेडकर को लेकर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
सत्र के आखिरी दिन प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने विजय चौक से संसद भवन तक मार्च किया। उन्होंने गृह मंत्री से अपने बयान पर माफी की मांग की है। हालांकि इस प्रदर्शन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कहीं नजर नहीं आए। चूंकि राहुल गांधी का नाम FIR में दर्ज किया गया था, इसलिए उन्होंने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व नहीं किया। अब यह माना जा रहा है। कांग्रेस सूत्रों ने यह भी कहा है कि वह एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली से बाहर गए हैं। दूसरी ओर, बीजेपी सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और नागालैंड की एक महिला सांसद के साथ दुर्व्यवहार के आरोप पर बीजेपी सांसदों से माफी की मांग की।
पूरे सत्र के दौरान संसद में सिर्फ हंगामा
देखा जाए तो पूरे सत्र के दौरान संसद में सिर्फ हंगामा और प्रदर्शन ही देखने को मिला, जबकि सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसान और देश की सुरक्षा जैसे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इस बार संसद में पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों में अडानी, जॉर्ज सोरोस, नेहरू और अंबेडकर का नाम उछलता रहा।
शीतकालीन सत्र में 84 करोड़ का घाटा
अक्सर आप संसद सत्र से जुड़ी ऐसी खबरें देखते और सुनते हैं, लेकिन शायद ही कभी इन्हें गंभीरता से लेते हों, लेकिन इस खबर पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह आपकी और हमारी टैक्स कमाई से जुड़ी है, जिसका इस्तेमाल कार्यवाही चलाने के लिए किया जाता है। संसद ख़त्म हो गई है। संसद के शीतकालीन सत्र में 20 दिनों तक कामकाज नहीं होने से 84 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। बता दें कि संसद की कार्यवाही में हर मिनट करीब 2.50 लाख रुपये खर्च होते हैं।




