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Wednesday, March 18, 2026
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भुजिया व पापड़ के लिए एफएसएसएआई लाइसेंस बनना हुआ दुर्लभ

बीकानेर, 26 जून (हि.स.)। राजस्थान के विश्वप्रसिद्ध बीकानेरी भुजिया व पापड़ का फूड सेफ्टी एण्ड स्टैण्डर्ड्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) लाइसेंस बनना अब दुर्लभ हो गया है। यह लाईसेंस पहले बीकानेर में ही बन जाता था लेकिन अब इसका सेन्टर दिल्ली में बनाने की एफएसएसएआई ने कवायद की है। इससे व्यापारियों के व्यापार करने में बहुत समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बीकानेर पापड़-भुजिया मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वेदप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि जैसा कि सभी जानते है भारत में कोई भी फूड प्रोडक्ट बनाने के लिए सबसे पहली अनिवार्यता एफएसएसएआई लाइसेंस की है, उसे बनाने के लिए पहले भी व्यापारियों को अपनी व्यवस्थाओं को नियमावली के अनुरूप करना होता था। परंतु हाल ही में हुए बदलाव के कारण अब 12 लाख से ऊपर के टर्नओवर वाली फर्मों को लाइसेंस दिल्ली से बनाना पड़ेगा जो कि बहुत मुश्किल हो गया है। क्योंकि जहां 1500 रुपये 5 साल की फीस यहां के व्यापारी दे रहे थे उसी लाइसेस की 37 हजार 500 रुपये 5 साल की सरकारी फीस उन्हें देनी होगी। उसके साथ ही वहां के नियम इतने कड़े है कि हर किसी के लिए वहां के नॉम्र्स पर खरा उतरना भी सम्भंव नहीं हो पा रहा है। वैसे ही मन्दी ओर कोरोनाकाल की मार झेल रहे व्यापारी लाइसेंस के लिए दिल्ली के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि जब सभी सुविधाएं यहां पहले से उपलब्ध थी तो लाइसेंस का दिल्ली स्थानांतरण का कोई औचित्य ही नहीं था। ऊपर से कई गुना बढ़ी हुई फीस जिसका व्यापारी हित में कोई सुविधा भी नहीं है और यहां बन रहे 12 लाख टर्नओवर से हम ऐसे समझ सकते हैं। प्रतिदिन 3333 रुपये की बिक्री करने वालों को ही या यूं समझ सकते है अभी वर्तमान में पापड भुजिया 200 रूपये किलो माने तो दिन में 16 किलो माल बेच पाने वालों के लिए ही यानी लगभग 99 प्रतिशत व्यापारियों को दिल्ली से बना लाइसेंस अनिवार्य होगा। इसके साथ ही जिनके पहले से स्टेट गवर्नमेंट से लाइसेंस बने हुए है उन्हें भी इसे दिल्ली से दोबारा बनवाना पड़ेगा। चाहे उनकी लाईसेंस की एक्सपायर डेट में समय बाकी हो उन्हें भी नए के भांति दुबारा से अप्लाई करना होगा। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए भुजिया पापड़ एसोसिएशन ने पहले भी जनप्रतिनिधियों को इस समस्या के निवारण के लिए अवगत करवाया था पर कुछ भी सार्थक सामाधान न हो सका। अगर लाइसेंस के लिए इस प्रकिया में व्यापक सुधार न हुआ तो आने वाले कुछ महीनों में पापड़ भुजिया के सैंकड़ों कारखाने बन्द हो जाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव/ ईश्वर

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