नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। क्या आपको पता है कि दुनिया भर में कई कंपनियां जनरेशन Z के युवाओं को नौकरी देने से बच रही हैं। जी हां आपको ये बात अजीब लगेगी, मगर ये बात बिल्कुल सच है। तो चलिए आज हम आपको बताएंगे कि generation-z को कंपनियां क्यों नहीं काम देना चाहती हैं।
Generation Z को कंपनियां क्यों नहीं देना चाहती काम?
हाल ही में एक सर्वे में पता चला है कि कई प्रमुख कंपनियां नए कॉलेज ग्रैजुएट्स को काम पर रखने से कतराती हैं। कंपनियों का कहना है कि उन्हें इन युवाओं के काम करने का तरीका, कम्युनिकेशन स्किल्स और काम के प्रति उनका बेपरवाह व्यवहार पसंद नहीं आता। सर्वे में बताया गया कि कंपनियों ने हाल ही में ग्रैजुएट्स के काम को संतोषजनक नहीं पाया। लगभग 75% कंपनियों ने कहा कि उनके काम की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। आधे से ज्यादा रिक्रूटर्स ने कहा कि इन युवाओं में प्रेरणा की कमी है, और 39% ने उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स में कमी की बात की।
स्किल्स की होती है कमी
गुयेन, जो इंटेलिजेंट डॉट कॉम के करियर विकास सलाहकार हैं, ने कहा कि हाल ही में पास हुए युवाओं को ऑफिस के माहौल में ढलने में परेशानी होती है। वे अपने कॉलेज के जीवन से एकदम अलग माहौल में आ जाते हैं।
इन युवाओं के पास कुछ सैद्धांतिक ज्ञान होता है, लेकिन व्यावहारिक अनुभव और ऑफिस की संस्कृति को समझने के लिए जरूरी स्किल्स की कमी होती है। इसलिए, जनरेशन Z के युवा काम के माहौल में सफल होने के लिए और बेहतर तैयारी की जरूरत है।
प्रोफेशनलिज्म की कमी
सर्वे में बताया गया कि कंपनियों ने हाल ही में ग्रैजुएट्स के काम को संतोषजनक नहीं पाया। लगभग 75% कंपनियों ने कहा कि उनके काम की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। आधे से ज्यादा रिक्रूटर्स ने कहा कि इन युवाओं में प्रेरणा की कमी है, और 39% ने उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स में कमी की बात की।
शिक्षा प्रणाली पर सवाल
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के लिए शिक्षा प्रणाली जिम्मेदार है। वे कहते हैं कि कॉलेज में मिली जानकारी वास्तविक जीवन की जरूरतों से मेल नहीं खाती।
Generation Z को काम न मिलने का कारण तो आपने जान ही लिया, चलिए अब बताते हैं कि कौन हैं ये Generation Z?
कौन है Generation Z?
जनरेशन Z मिलेनियल्स के बाद की पीढ़ी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह पीढ़ी सबसे विविध और बहुसांस्कृतिक मानी जाती है। मार्केटिंग के लिए चुनौती यह है कि ये युवा पहले से हर मार्केटिंग ट्रिक को समझते हैं। इंटरनेट की इस तेज़ दुनिया में Generation Z के बच्चे भी काफी आगे बढ़ चुके हैं। शायद हम में से कई लोग Generation Z के बारे में नहीं जानते होंगे। आपकों बता दें कि Generation Z उन बच्चों और युवाओं को कहते हैं 1995-2012 के बीच में पैदा हुए हैं। आपको बता दें कि gen-z काफी अलग माना जाता है तो चलिए आपको इसका भी कारण बता देते हैं।
यह पीढ़ी क्यों है अलग?
जनरेशन Z के सदस्यों की शिक्षा में बदलाव देखा गया है। वे अपने से पहले की पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा कॉलेज में दाखिला लेते हैं। 2018 में 18 से 21 साल के बच्चों में से सत्तावन प्रतिशत कॉलेज में नामांकित थे, जो पिछले जनरेशन से ज्यादा है। ये युवा ऑनलाइन और वास्तविक दुनिया के दोस्तों के बीच अंतर नहीं करते। वे विभिन्न समुदायों में आसानी से घुल-मिल जाते हैं और अपने कारणों को बढ़ावा देते हैं। gen-Z संवाद में विश्वास करती है और विचारों के मतभेदों को भी स्वीकार करती है।
Generation Z के Lingo
ये पीढ़ी अपनी मातृभाषा के साथ-साथ कुछ खास शब्दों का भी उपयोग करती है, जिनका मतलब अब बदल चुका है।
Snowflake- पहले इसका मतलब बर्फ का एक टुकड़ा था, लेकिन अब इसका मतलब किसी को खास और अत्यधिक संवेदनशील मानना है, जो कभी-कभी अपमान के रूप में उपयोग होता है।
Purple– अब यह सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि ऐसे क्षेत्रों को दर्शाता है जहां मतदाता डेमोक्रेट और रिपब्लिकन में बंटे हुए हैं।
Garbage time- खेल के अंतिम क्षणों को संदर्भित करता है जब एक टीम को बहुत बढ़त मिल जाती है।
Glow-up- ये किसी के रूप में सुधार को दर्शाता है, जैसे नई हेयरस्टाइल या आत्मविश्वास में बढ़ोतरी।
Lit- इसका मतलब आकर्षक दिखना होता है। अगर कोई आपको कहता है कि आप लिट हैं, तो यह तारीफ है।
Bottle episode- सस्ते में बने टेलीविज़न एपिसोड को कहते हैं, जो आमतौर पर एक सेटिंग तक ही सीमित होता है।
Glow-up– यह किसी के रूप में सुधार को दर्शाता है, जैसे नई हेयरस्टाइल या आत्मविश्वास में बढ़ोतरी।
Salty- इसका मतलब किसी के कड़वे या नाराज होने से होता है, आमतौर पर छोटी-छोटी बातों पर।
Snack- अब इसका मतलब किसी के अच्छे लुक से भी है। इसे उन लोगों के लिए उपयोग करते हैं जिनसे आपको रोमांटिक रुचि होती है।




