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Tuesday, March 3, 2026
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Paris Olympic 2024: स्वर्णिम रहा है भारतीय हॉकी टीम का इतिहास, विश्व में सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक है भारत के नाम

भारतीय हॉकी टीम ने दुनिया में सबसे ज्यादा 8 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। भारत के बाद नीदरलैंड ने 6 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पेरिस ओलंपिक में आज भारतीय राष्ट्रीय पुरुष हॉकी टीम ने स्पेन को हराकर कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। इसी के साथ भारत के पास पेरिस ओलंपिक (paris olympics) में कुल 4 पदक हो गए हैं। चारों ही कांस्य पदक हैं। पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने काफी शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में जर्मनी जैसी मजबूत टीम के हाथों भारतीय टीम को 3-2 से हार का सामना करना पड़ा। 

आज भले ही भारतीय हॉकी टीम को कांस्य पदक जीतने के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन भारतीय हॉकी टीम का हमेशा से ऐसा हाल नहीं रहा है। भारतीय हॉकी टीम का इतिहास स्वर्णिम रहा है। भारतीय हॉकी टीम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम है। भारतीय राष्ट्रीय पुरुष हॉकी टीम ने अबतक कुल 8 गोल्ड मेडल जीत चुकी है। भारत के बाद नीदरलैंड की टीम आती है। जिसने अबतक 6 गोल्ड मेडल जीते हैं।

कब-कब भारतीय टीम ने मेडल जीते

भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में अपना पहला गोल्ड मेडल साल 1928 के एम्सटर्डम

ओलंपिक गेम्स (amsterdam olympics) में जीता था। इस ओलंपिक ने दुनिया के सबसे महान हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद (dhyanchand) को मैदान में देखा। भारत के इस महान खिलाड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 14 गोल किए। भारतीय टीम ने एम्सटर्डम ओलंपिक के 5 मैचों में कुल 29 गोल किए। भारतीय टीम ने नीदरलैंड के खिलाफ फाइनल मैच खेला। जिसमें हॉकी के जादुगर ध्यानचंद की हैट्रिक की बदौलत भारतीय टीम ने 3-0 से ये मुकाबला अपने नाम कर पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

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लॉस एंजिल्स 1932 में दूसरा स्वर्ण मिला

1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक से पहले भारतीय टीम बिखरी हुई थी। भारतीय और एंग्लो भारतीय एक दूसरे के खिलाफ थे। यहां तक की भारतीय टीम की आधिकारिक पोशाक पगड़ी को भी एक सदस्य ने पहनने से इनकार कर दिया था। हालांकि जब ओलंपिक शुरू हुआ तब भारतीय टीम ने सारे आपसी झगड़े भूलकर बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस शानदार टीम ने मेजबान टीम को 24-1 से हराया था। इस मैच में ध्यानचंद के छोटे भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए।

जब भारत जैसी आक्रामक टीम फाइनल में पहुंची तो उसका मुकाबला जापान की टीम से हुआ। लेकिन भारतीय टीम के अटैक का जापान के पास कोई जवाब नहीं था। इस मैच में इंडियन टीम ने 11-0 से जापान को पटखनी देकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीता। 

बर्लिन ओलंपिक 1936

वैसे तो हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद के बारे में कई किस्से मशहूर हैं। लेकिन इनमें सबसे बेहतरीन किस्से बर्लिन ओलंपिक से ही जुड़े हुए थे। बर्लिन ओलंपिक में भारतीय टीम ने जीतकर लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। बर्लिन ओलंपिक में गोल्ड जीतकर भारतीय टीम ने ध्यानचंद को तोहफा दिया था, क्योंकि इसके बाद उन्होंने सन्यास की घोषणा कर दी थी। 

बर्लिन ओलंपिक ने भारतीय टीम सभी टीमों पर हावी रही। इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने 30 गोल किए। वहीं हंगरी, जापान, फ्रांस और यूएसए जैसी टीमें भारत के खिलाफ लीग मैच में एक भी गोल नहीं कर पाईं। सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले में ध्यानचंद और उनके छोटे भाई रूपचंद के शानदार प्रदर्शन की बदौलत दोनों मैच भारतीय टीम ने जीत लिए। बर्लिन ओलंपिक का फाइनल मुकाबला भारत और जर्मनी के बीच हुआ। पूरे मैच के दौरान भारतीय टीम जर्मनी पर हावी रही। जर्मनी की टीम को 8-1 से हराकर भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। इसी के साथ ध्यानचंद ने गोल्ड मेडल के साथ हॉकी को अलविदा कह लिया।

इसके बाद भारतीय टीम ने लंदन ओलंपिक 1948, हेलसिंकी ओलंपिक 1952 और मेलबर्न ओलंपिक 1956 में लगातार गोल्ड मेडल हासिल किया।

टोक्यो ओलंपिक 1964 

टोक्यो ओलंपिक भारतीय टीम के लिए एक नया जीवनदान की तरह था, क्योंकि 1960 रोम ओलंपिक में भारतीय टीम को पाकिस्तान ने फाइनल में 1-0 से हरा दिया था। जिसके बाद भारतीय टीम की काफी किरकिरी हुई। क्योंकि पाकिस्तान ने भारत को हराकर अपना पहला गोल्ड मेडल जीता था। खैर 1964 के ओलंपिक में भारतीय टीम ने रोम ओलंपिक का बदला लेते हुए फाइनल में पाकिस्तान को हराकर एक बार फिर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।

मास्को ओलंपिक 1980 

मास्को ओलंपिक से पहले 3 ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। साल 1968 के मेक्सिको और 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय टीम ब्रॉन्ज मेडल ही जीत सकी। वहीं 1976 के ओलंपिक में भारतीय टीम 7वें स्थान पर रही, लेकिन साल 1980 भारत के लिए एक ठंडी हवा का झोंका बनकर आया। मास्को ओलंपिक के फाइनल में भारतीय टीम का मुकाबला स्पेन से था, जो जबरदस्त फॉर्म में थी। इस मुकाबले को भारतीय टीम ने 4-3 से जीतकर अपना 8वां और अंतिम गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में जबरदस्त गिरावट देखने को मिला। 

1980 के बाद पहली बार 2020 में आया ओलंपिक मेडल

मॉस्को ओलंपिक के बाद भारतीय हॉकी टीम 2016 के रियो ओलंपिक तक एक भी मेडल नहीं जीत सकी। इसके बाद भारतीय हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 40 सालों बाद अपनी झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाल सकी। अब पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय टीम लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल जीत सकी है।

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