खूंटी,एजेंसी। केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय और झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी के तत्वावधान में किसानों और अन्य संबंधित हितधारकों के लिए एक दिवसीय जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।गुरुवार कों तोरपा के दियांकेल स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कृषि क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम को राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के निदेशक डॉ अभिजीत कर ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर प्रयास किये हैं और उन्हीं प्रयासों के तहत कृषि में सौर पंपों का उपयोग किया जा रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सिंचाई के लिए सौर पंपों को बढ़ावा देने की बात करते हुए लगातार काम करते आ रहे हैं। डॉ कर ने कहा कि किसानों की सिचाईं ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारत को इस तकनीक का सर्वाेत्तम उपयोग करना होगा। हमें ऊर्जा बचत पर ध्यान देते हुए कृषि ही नहीं, बल्कि घरेलू कार्यों में भी ऊर्जा बचत पर काम करना होगा।
कृषि ही नहीं, बल्कि घरेलू कार्यों में भी ऊर्जा बचत पर काम करना होगा
कार्यक्रम में केंद्र के प्रभारी डॉ. ज्योतिर्मय घोष ने कहा कि अधिकतर कृषि मशीनें जीवाश्म ईंधन से संचालित होती हैं, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान करती हैं और बदले में, जलवायु परिवर्तन में तेजी लाती हैं। सौर, पवन, बायोमास, ज्वारीय, भू-तापीय, छोटे पैमाने पर जलविद्युत, जैव ईंधन और तरंग-जनित शक्ति जैसे नवीकरणीय संसाधनों को बढ़ावा देकर इस तरह की पर्यावरणीय क्षति को कम किया जा सकता है। जरेडा रांची के वरिष्ठ कंसल्टेंट प्रभाकर झा ने किसानों को विस्तृत रूप से लाइव वीडियो दिखाकर इसके विषय में बताया। उन्होंने ऊर्जा बचत के लिए किसानों से नए तकनीक अपनाकर खेती करने की बात कही। कार्यक्रम में केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजन चौधरी, ई प्रा कु परमगुरु, आशुतोष प्रभात, राहुल लाखेर समेत 55 कृषक मित्र औरं एफपीओ, एनजीओ के कर्मी उपस्थित थे।




