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Sunday, March 22, 2026
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सुकमा : आत्मसमर्पित 06 नक्सली युवाओं का नसबंदी पुन: खोलने कराई गई शल्य चिकित्सा

सभी 06 युवाओं का नक्सलियों के द्वारा दबाव पूर्वक नसबंदी करा दिया गया था सुकमा एसपी केएल ध्रुव ने नक्सलियों की दोहरी मानसिकता को स्थानीय युवाओं को समझने की अपील की सुकमा, 18 मार्च (हि.स.)। जिले के आत्मसमर्पित युवक-युवतियों में से 06 आत्मसमर्पित दंपती परिवार ने सुकमा एसपी केएल ध्रुव को बताया कि वे नक्सली दलम में थे तो विवाह के पूर्व सभी युवाओं का बड़े व बाहरी नक्सलियों के द्वारा दबाव पूर्वक नसबंदी करा दिया गया था ताकि वे संतानोत्पति न कर सके। सुकमा एसपी केएल ध्रुव ने गुरुवार को जानकारी देते हुए नक्सलियों की इस दोहरी मानसिकता व दोहरे चेहरे को स्थानीय युवाओं को समझने की अपील की है। उन्होंने बिना डर व भय के आत्मसर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया है। पुलिस अधीक्षक सुकमा ने सभी 06 आत्मसमर्पित युवाओं का जिसमें राकेश पिता सन्नू साकिन पोंजे थाना बीजापुर हाल जिला सुकमा, मड़कम भीमा उर्फ अर्जुन पिता स्व. मड़कमबंडी साकिन ग्राम पेद्दाबोड़केल थाना चिंतलनार जिला सुकमा, पोडियम गंगा पितास्व. पोड़ियम देवा जाति मुरिया निवासी गोडेलगुड़ा थाना पोलमपल्ली, जिला सुकमा, करटामी वागा उर्फ बादल पिता जोगा निवासी साकिन मुंडूम थाना कुकानार जिलासुकमा, बोड्डू व्यंकटेश उर्फ राजीव पिता स्व. राजा उम्र 31 वर्ष जाति राजगोंड निवासी ग्राम आसीरगुड़ा, थाना एराबोर, हाल गगनपल्ली थाना एर्राबोर व वेट्टी कमलू पिता आयतु निवासी कमकानार थाना गंगालूर जिला बीजापुर को राजधानी के प्रतिष्ठित अस्पताल रामकृष्ण केयर रायपुर से तत्काल समन्वय स्थापित कर नसबंदी को पुन: खोलने के लिए भेजा। जहां उनकी व सेक्टॉमी रिवर्सल शल्य चिकित्सा कराई गई है। पुलिस अधीक्षक सुकमा के इस संवेदनशीलता के लिये आत्मसमर्पित दंपतियों ने आभार जताया है तथा इन दंपतियों ने नक्सली दलम के इस अमानवीय कृत्य (नसबंदी) के खिलाफ आवाज उठाने व बिना डर व भय के आत्मसमर्पण करने की अपील की है। उल्ललेखनीय है कि बड़े व बाहरी नक्सली नेताओं का स्वयं का परिवार व बच्चे हैं। वहीं वे दलम में स्थानीय युवाओं को विवाह उपरांत संतानोत्पति से रोकने हेतु दोहरा मापदण्ड अपनाते हुये दबाव पूर्वक अमानवीय कृत्य नसबंदी करवाते हैं, ताकि वे वंश वृद्धि न कर सके। इसके पीछे भी उनकी विचारधारा का एक सुनियोजित षडयंत्र है कि यदि दलम में स्थानीय युवा विवाह उपरांत वंश वृद्धि करते है तो संतान के प्रति माता-पिता की संवेदना के डर से उन्हें दलम में उनकी दल संख्या कम होने की संभावना रहती है। सिर्फ इसलिए वे इस तहत के अमानवीय कृत्य नसबंदी को दबाव पूर्वक करवाते है। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे

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