नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया को चार साल के लिए बैन कर दिया गया है। वे पहली बार 2013 में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप और विश्व चैंपियनशिप में पुरुषों के फ्रीस्टाइल 60 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर सुर्खियों में आए थे। उन्हें यह सजा राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) के निर्देशों की अवहेलना के लिए दी गई है, जबकि इससे पहले उन्हें अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महासंघ ने उनके अमार्यादित आचरण के चलते उन्हें निलंबित कर दिया था। दरअसल, यह बात बात उस वक्त की है जब इस साल मार्च में सोनीपत में परीक्षण के लिए अपने यूरीन का सैंपल देने से उन्होंने इनकार कर दिया था। जिसके बाद पुनिया को अस्थायी रूप से बैन कर दिया गया था। तब विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) ने इसका कारण जानना चाहा। फिर भी कोई समाधान नहीं निकलने पर 23 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया। कुल मिलाकर, वह ओलंपिक ट्रायल में इसी कारण से भाग नहीं ले सके थे। हालांकि, बजरंग ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।
“जो टेस्ट किट दी गई थी वह एक्सपायर हो गई थी”
इस मामले में पहलवान बजरंग पुनिया का पक्ष यह है कि उसे जो टेस्ट किट दी गई थी वह एक्सपायर हो गई थी। लेकिन जब सच का पता लगाने के लिए जांच हुई तो ‘NADA’ ने उन्हें दोषी करार दिया और सजा भी दी थी, जांच में यही निकलकर सामने आया कि डोप परीक्षण के लिए यूरिन का सैंपल देने से एथलीट द्वारा किया गया साफ इनकार जानबूझकर था। इसके चलते पुनिया अगले चार साल तक किसी भी प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी ने उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया है
कुल जांच का निष्कर्ष यह था कि एथलीट बजरंग पुनिया ने एंटी डोपिंग रूल 2021 के अनुच्छेद 20.1 और 20.2 के अनुसार अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह से उपेक्षा प्रदर्शित की है। ऐसे में नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी ने उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया है। अब उन पर चार साल का बैन लगाया है । बैन का मूल कारण एंटी डोपिंग कोड का उल्लंघन है। जिसके बाद कुश्ती की वर्ल्ड लेवल की संस्था UWW यानी कि यूनाइटेड वर्ड रेसलिंग के किसी टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पाएंगे। पैनल का मानना है कि पुनिया अनुच्छेद 10.3.1 के तहत प्रतिबंधों के लिए उत्तरदायी है। इस बैन का मतलब है कि बजरंग प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं तो वे आगे चार साल तक विदेश में कोचिंग की नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं।
बजरंग पुनिया द्वारा किया था निलंबन का विरोध
बजरंग ने शुरुआत में निलंबन का विरोध किया था, जिसके बाद और 31 मई को NADA के अनुशासन-विरोधी डोपिंग पैनल (ADDP) ने आरोपों की औपचारिक सूचना जारी होने तक अस्थायी रूप से निलंबन हटा दिया था। हालांकि, इसके बाद फिर 23 जून को NADA ने औपचारिक रूप से उन्हें आरोपों के बारे में सूचित किया। लेकिन पुनिया ने 11 जुलाई को आरोपों के खिलाफ चुनौती दायर की जिसकी सुनवाई 20 सितंबर और 4 अक्टूबर को की गई।




