नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी यश दयाल ने अपने खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज FIR को निरस्त करने की मांग की है।
दरअसल, यह एफआईआर 6 जुलाई को एक महिला की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें यश दयाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आते ही सुर्खियों में आ गया, जिसके बाद यश दयाल ने खुद को निर्दोष बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की अपील की है। दायर याचिका में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, इंदिरापुरम थाने के प्रभारी अधिकारी और शिकायतकर्ता महिला को पक्षकार बनाया है। इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ में जल्द सुनवाई की संभावना जताई जा रही है।
यश दयाल ने महिला पर लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप
भारतीय क्रिकेटर यश दयाल ने खुद पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के जवाब में महिला के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रयागराज के खुल्दाबाद थाने में महिला के विरुद्ध ब्लैकमेलिंग और मानसिक उत्पीड़न को लेकर लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। यश दयाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि संबंधित महिला उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रही है और मानसिक दबाव बनाकर पैसों की मांग कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि महिला ने उनकी छवि खराब करने और क्रिकेट करियर को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी है। इस मामले में यश दयाल ने प्रयागराज पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें न्याय मिले और ब्लैकमेलिंग की साजिश का पर्दाफाश किया जाए।
मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन
यौन उत्पीड़न के आरोप और प्रत्यारोपों के बीच अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। दोनों पक्षों द्वारा की गई कानूनी पहल के चलते मामला अब और भी पेचीदा हो गया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत यौन उत्पीड़न जैसे अपराधों के लिए सख्त दंड और कठोर कानूनी प्रावधान तय किए गए हैं। ऐसे में इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला न सिर्फ यश दयाल बल्कि शिकायतकर्ता महिला के लिए भी अहम साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च न्यायालय इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और क्या यश दयाल को अंतरिम राहत मिलती है या नहीं।




