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Wednesday, March 18, 2026
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क्या है स्वंत्रता सेनानियों के वंशजों के आरक्षण का मुद्दा, जिसकी वजह से शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा

शेख हसीना के इस्तीफे से पहले 4 अगस्त को बांग्लादेश में हुई हिंसा में 100 लोगों की मौत हो गई थी।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में तख्तापलट हो गया है। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा देने के बाद देश छोड़ दिया है। सेना ने अंतरिम सरकार बनाने का ऐलान किया है। बीते एक महीने से बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे। जिसकी वजह से 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ये प्रदर्शन स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को मिलने वाले आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए थे। लेकिन ये पूरा विवाद क्या है, चलिए समझते हैं।

क्या है स्वंत्रता सेनानियों के वंशजों को मिलने वाला आरक्षण?

1971 की जंग के बाद पूर्वी पाकिस्तान और पाकिस्तान अलग हो गए। पूर्वी पाकिस्तान बना बांग्लादेश। बांग्लादेश के निर्माण के बाद शेख मुजिबुर्रहमान बने बांग्लादेश के अंतरिम राष्ट्रपति, बाद में वो देश के प्रधानमंत्री बने और फिर देश के राष्ट्रपति बनाए गए। बांग्लादेश के गठन के बाद 1972 में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को आरक्षण देने का ऐलान किया, आरक्षण के दायरे में उन महिलाओं को भी रखा गया जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने यातनाएं दी थीं। 1975 में मुजिबुर्रहमान की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या के बाद आरक्षण के दायरे को बढ़ा दिया गया।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद के सालों में जैसे-जैसे स्वतंत्रता सेनानी गुज़रते गए आरक्षण का लाभ कम लोगों को मिलने लगा। इससे कोटा सिस्टम के गलत इस्तेमाल को लेकर अटकलें शुरू हुईं। स्वतंत्रता सेनानियों के बाद उनके बच्चों को और फिर उनके नाती-नातिनों को आरक्षण का लाभ मिलने लगा। ये आरोप भी लगे कि स्वंत्रता सेनानियों के वंशजों के नहीं होने पर शेख हसीना की पार्टी से जुड़े लोग इसका बेजा फायदा उठाने लगे। इसी के चलते इस कोटे के विरोध में 1 जुलाई से प्रदर्शन शुरू हुए जो धीरे-धीरे हिंसक हुए और 4 अगस्त को बेकाबू हो गए, जिसके बाद शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा।

इतवार को हिंसा में मारे गए 100 लोग

इससे पहले रविवार को देश भर में हुई हिंसा में करीब 100 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए। पुलिस ने हजारों प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं, जिसके कारण ये मौतें हुईं हैं। रविवार को हुई मौतों की संख्या, जिसमें कम से कम 14 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। यह आंकड़ा बांग्लादेश के हाल के इतिहास में किसी भी विरोध प्रदर्शन में एक दिन में सबसे अधिक है।

कब हुई प्रदर्शन की शुरुआत

दरअसल हिंसा की शुरुआत तब हुई जब प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की। रविवार 4 अगस्त के दिन प्रदर्शन सबसे भयावह रहा क्योंकि इस दिन कई लोग घायल हुए और 98 लोगों की मौत हो गई।

 

हालातों को देखते हुए बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने देश में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। पूरे देश में मोबाइल और इंटरनेट सेवा भई बाधित है। पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के चलते जनता की सुरक्षा के लिए सोमवार, मंगलवार और रविवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है।

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