नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। भारत और कनाडा के बीच हाल के कूटनीतिक तनाव ने भारतीय छात्रों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप में भारत सरकार पर उंगली उठाने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ गई है। इस विवाद ने दोनों देशों के राजनयिकों को निष्कासित करने और नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करने तक का रास्ता प्रशस्त किया है।
भारत-कनाडा के रिश्ते से छात्रों पर बुरा प्रभाव
कनाडा में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों का मनोबल कमजोर हो गया है। उनके माता-पिता अपनी संतान की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से कई कॉल आ रहे हैं, जिनमें माता-पिता अपने बच्चों की भलाई की चिंता जता रहे हैं। छात्रों की मानसिक स्थिति पर इस तनाव का गहरा असर पड़ा है और भविष्य में कनाडा में पढ़ाई करने की उनकी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
विदेशी छात्रों से कनाडा को लाभ
कनाडा के लिए भी यह स्थिति असुविधाजनक है क्योंकि कनाडा की अर्थव्यवस्था में विदेशी छात्रों का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा हर साल 30 बिलियन डॉलर का योगदान किया जाता है, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत भारतीय छात्र होते हैं। यदि भारत सरकार ने वीजा सुविधाओं को नियंत्रित किया या छात्रों को कनाडा जाने से रोका, तो इससे कनाडाई अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है।
हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत से छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा में ज्याद संख्या में आते हैं। 2022 में, कुल 5.5 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से 2.26 लाख भारतीय थे। इन छात्रों के योगदान से न केवल शैक्षिक संस्थान लाभान्वित होते हैं। बल्कि ये स्थानीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर आवास और गिग अर्थव्यवस्था को भी बनाए रखते हैं।
कनाडा में छात्रों को नौकरी की कमी का सामना करना पड़ रहा है
हालांकि, कनाडा में बढ़ते आवास संकट और नौकरी की कमी ने छात्रों को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूर किया है। छात्रों की बढ़ती संख्या अब अन्य देशों, जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, और ऑस्ट्रेलिया की ओर मुड़ रही है। पंजाब में 2023 में रिकॉर्ड 11.9 लाख पासपोर्ट जारी होने का तथ्य दर्शाता है कि भारतीय छात्र अब अन्य देशों में पढ़ाई की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
सामाजिक ही नहीं आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है
इस कूटनीतिक विवाद का न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक प्रभाव भी पड़ सकता है। यदि भारतीय छात्रों का प्रवाह रुका, तो कनाडा की अर्थव्यवस्था में कमी पैदा होगी। यह स्थिति दोनों देशों के लिए चिंताजनक है, और इसे सुलझाने के लिए राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भरता बढ़ गई है।




