नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देश का चुनावी माहौल गरमा रहा है। सभी छोटे बड़े दल अपने अनुसार अपनी लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां शुरू कर चुके हैं। एक तरफ कल जहाँ पटना में कई विपक्षी पार्टियों ने एक साथ बैठक कर आने वाले चुनाव 2024 की तैयारियों पर चर्चा की। पटना में हुई इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, शरद पवार समेत 15 विपक्षी दलों के तमाम बड़े नेता शामिल हुए थे। सभी प्रमुख नेताओ ने आगामी लोकसभा चुनाव में एक साथ चुनाव लड़ने और बीजेपी को कड़ी टक्कर देने का निर्णय लिया। ऐसे में जैसे-जैसे 2024 के लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। वैसे छोटे राजनीतिक दलों अपने लिए नफा नुकसान का गणित बैठना शुरू कर दिया हैं।
छोटे दल का हो रहा बड़ा प्रभाव
देश की राजनीति में बड़े दलों के साथ-साथ छोटे दलों की भूमिका भी काफी प्रभावी रही है। छोटे-छोटे दल विभिन्न जाति वर्गों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं। वोट बैंक को प्रभावित करते हैं और चुनावों में हार-जीत का अंतर पैदा कर देते हैं। इन साभी दलों का प्रभाव यूपी, बिहार से लेकर हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। अब इन दलों ने लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत को दिखाकर बड़े दलों को रिझाना शुरू कर दिया है। छोटे दलों ने उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता और ताकत के प्रदर्शन ने चुनावी माहौल को गरमाना शुरू कर दिया है। इस क्रम में ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक दल और केशव देव मौर्य के नेतृत्व वाली महान दल समेत तमाम दल शामिल है।
उत्तर प्रदेश छोटे दलों का प्रभाव
उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटे छोटे दल चुनावों में बड़ा प्रभाव डालते आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने यूपी चुनाव 2017 में कांग्रेस और लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा के साथ गठबंधन किया। वर्ष 2017 में सपा 47 सीटों पर सिमटी। वहीं, लोकसभा चुनाव 2014 की तरह ही 2019 में भी सपा को बसपा जैसे दल से गठबंधन के बाद भी 5 सीटों से संतोष करना पड़ा। यूपी चुनाव में पार्टी ने रालोद, सुभासपा, महान दल के अलावा जनवादी सोशलिस्ट पार्टी और अपना दल (कमेरावादी) के साथ गठबंधन किया। छोटे दलों के साथ गठबंधन का फायदा सपा को मिला। पार्टी ने प्रदेश में रिकॉर्ड 32 फीसदी वोट मिला। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी सपा को 29.2 फीसदी वोट मिले थे, जब पार्टी ने 224 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
यूपी चुनाव 2022 में सपा 111 सीटों तक सिमट कर रह गई। इसके साथ भाजपा के पास भी अपना दल (एस) के साथ पुराना गठबंधन है। यूपी चुनाव 2022 में अपना दल (एस) ने 17 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। उनमें से 15 पर जीत हासिल की। भाजपा और सपा के बाद पार्टी अब राज्य विधानसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा की यूपी में एक अन्य सहयोगी निषाद पार्टी के छह विधायक हैं। इसके अध्यक्ष संजय कुमार निषाद योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।




