AstraZeneca: कोविशील्ड पर खुलासे को लेकर डॉक्टरों ने कही ये बड़ी बात, कहा- भारत को पहले से थी जानकारी

United Kingdom: कोविशील्ड पर खुलासे को लेकर भारत में भी हलचल मच गई है। इस बीच भारत के डॉक्टरों ने कहा कि एस्ट्राजेनेका का कोर्ट में इस बात को मान लेना कोई नई बात नहीं है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। ब्रिटेन की फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा युनाइटेज किंगडम की अदालत में स्वीकार करने के बाद कि कोविड-19 से बचाव करने वाले टीके से थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) होने के लक्षण हो सकते हैं। इस मामले में भारत में डॉक्टरों ने कहा कि यह कोई नई जानकारी नहीं है और वे इस चेतावनी से अच्छी तरह परिचित हैं।

एस्ट्राजेनेका के कुबुलनामे पर डॉक्टरों ने क्या कहा?

द हिंदू को दिए हुए इंटरवियू में केरल के नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कोविड टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा कि "एस्ट्राजेनेका का कोर्ट में इस बात को मान लेना कोई नई बात नहीं है। वैक्सीन से जुड़े डॉक्यूमेंट के लेकर 2021 में वैक्सीनेशन ड्राइव करने के दौरान इस तथ्य को मान्यता मिली। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने मई 2021 में इस तथ्य के बारे में लिखा। जिसे 2023 में अपडेट किया गया।

डॉक्टर ने किया खुलासा

डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा कि वैक्सीन की पहली डोज लेने वाले जिन लोगों में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) के लक्षण पैदा हुए। यह केवल उन्हीं तक सीमित है। 2024 में TTS का कोई खतरा नहीं है। बात आती है हार्ट अटैक की तो TTS और हार्ट अटैक का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं है। TTS एक रेयर सिम्पटम है जो किसी एक को हो सकता है। इस दौरान, शरीर में खून के थक्के होने से इसका असर दिमाग पर पड़ता है।

खराब जीवनशैली से बढ़ रही बीमारी

डॉक्टरों ने कहा कि दिल के दौरे और स्ट्रोक आमतौर पर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के कारण होते हैं। जिनमें धूम्रपान, शराब पीना, मधुमेह, हाई बल्ड प्रैशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट अटैक का पारिवारिक इतिहास और हाल ही में कोविड-19 भी एक अतिरिक्त कारण है।

सिरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने TTS पर क्या कहा?

इस मामले में केरल के डॉ. सीरिएक एब्बी फीलिप्स ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- "TTS के लक्षण अत्यंत दुर्लभ हैं। यह पहली बार नहीं हुआ जब एस्ट्राजेनेका ने इस तरह के खतरों को स्वीकार किया।" उन्होंने आगे कहा- इससे पहले कोविशील्ड बनाने वाली सिरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने अपनी जानकारी साझा किया कि 'कुछ मामलों में ब्लीडिंग के साथ TTS बहुत ही दुर्लभ और गंभीर संयोजन 1/70,000,000 से कम फ्रिक्वेंसी के साथ देखा गया है। कंपनी ने कहा था कि जिन लोगों को वैक्सीन लेने के बाद बहुत अधिक बुखार हो। उन लोगों पर आगे वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को रोका जाएगा।

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