क्या है TTS जो Covishield से हो सकता है? हार्ट अटैक को लेकर Astrazeneca ने क्या कहा

Thrombocytopenia Syndrome कई लोगों में नजर आ सकता है जिन्होंने एस्ट्राजेनेका की वक्सीन लगवाया है।
Thrombocytopenia Syndrome
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क| कोरोना की दवा बनाने वाली मशहूर फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका कंपनी ने अहम खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कोविड 19 के कई साइड इफेक्ट हो सकते हैं। एस्ट्राजेनेका ने ये भी बताया कि कोविड वैक्सीन से थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS हो सकता है।

TTS से क्या होगा नुकसान

TTS की वजह से शरीर में खून के थक्के जम जाते हैं। इसके अलावा बाॅडी में प्लेटलेट्स तेजी से गिरना शुरू हो जाती है। बाॅडी में ब्लड क्लाॅट होने के चलते ब्रेन स्ट्रोक या फिर कार्डियक अरेस्ट की आशंका बढ़ जाती है।

TTS क्या है?

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर में अलग-अलग जगहों पर ब्लड क्लाॅट होने लगता है और प्लेटलेट्स की संख्या में भी कमी आने लगती है। प्लेटलेट्स वो होता है जो खून के थक्के को मदद करता है। इसका कम होना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

किन लोगों में नजर आए हैं लक्षण

ये स्थिति उन लोगों में नजर आ सकती है जिन्होंने ने COVID-19 से बचाव के लिए कोविशील्ड के टीके लगाए हैं। इसमें वैक्सज़ेव्रिया, कोविशील्ड (एस्ट्राजेनेका) और जॉनसन एंड जॉनसन/जानसेन COVID-19 वैक्सीन शामिल है।

एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स बताए हैं-

-एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट के समक्ष दायर लीगल डॉक्यूमेंट में कहा यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर तैयार हुई कोरोना वैक्सीन से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ये साइड इफेक्ट्स थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम जैसे होने की आशंका है। लेकिन ये बहुत ही अलग होते हैं।

-कंपनी ने बताया है कि कई स्वतंत्र स्टडीज में इस वैक्सीन को कोरोना से निपटने में बेहद असरदार बताया है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन स्टडीज पर गौर करना अहम है।

एस्ट्राजेनेका के खिलाफ ब्रिटेन के जेमी स्कॉट नाम के शख्स ने केस दर्ज कराया था। स्कॉट का आरोप है कि कंपनी की कोरोना वैक्सीन की वजह से वह थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम से जूझते आ रहे हैं। वह ब्रेन डैमेज का शिकार हुए थे।

कोर्ट में क्या बताया गया

कोर्ट में जारी दस्तावेजों के अनुसार, एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड दुर्लभ मामलों में इस स्थिति की वजह बन सकती है। ये टीका कोविड 19 महामारी के दौरान पूरे भारत में लोगों को लगाया गया था।

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