नई दिल्ली। रफ्तार डेस्क। चीन ने बीआरआई प्रोजेक्ट को लेकर नेपाल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। दरअसल एक बार फिर नेपाल में ओली की सत्ता राज में आ गई है जिसके कारण चीन उत्साहित है और नेपाल पर दवाब बना रहा है।
नेपाल BRI को लेकर पीछे नहीं हटेगा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल ने कहा है कि नेपाल बीआरआई पर पीछे नहीं हटेगा लेकिन भारत की संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। नेपाल का मानना है कि भारत का विरोध करके न तो नेपाल प्रगति हासिल कर सकता है और नहीं ये नेपाली लोगों के हित में होगा।
भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहते हैं ओली
ओली अब भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहते हैं जो अपने पड़ोस में चीन के बढ़ते प्रभाव को खतरे के रूप में लेता है। चीन का मुकाबला और उससे छुटकारा पाने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री भारत का साथ चाहते हैं।
चीन से ग्रांट या सॉफ्ट लोन के खिलाफ नहीं है नेपाल
नेपाली कांग्रेस की ओर से इशारा किया गया है कि वह चीन से ग्रांट या सॉफ्ट लोन के खिलाफ नहीं है जिसमें लंबे समय में कम ब्याज पर पैसा लौटाना होता है। जून चीन के उप विदेश मंत्री नेपाल आए थे ताकि बीआरआई को आगे बढ़ाया जा सके लेकिन ऐसा हो नहीं सका। विश्लेषकों के अनुसार ओली भी ऐसा नहीं चाहते हैं कि चीन से उधार लेकर नेपाल बीआरआई लागू करे।
उल्लेखनीय है कि ओली ने ही चीनी राजदूत के इशारे पर नेपाल का नया विवादित मैप जारी किया था। चीन तो लगातार नेपाल सरकार पर बीआरआई को लागू करने को लेकर दबाव बनाता रहेगा पर नेपाली कांग्रेस के अलग विचार हैं। नेपाल में एक बार फिर से ओली की सरकार आ गई है।
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