नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) अवनीश कुमार ने यादव और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अवैध कब्जा हटाने को लेकर विशेष अभियान चलाने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश का लेटर वायरल होते ही पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया।
विवादित आदेश में क्या लिखा था?
वायरल हुए लेटर में कहा गया कि ग्राम समाज की जमीन, खलिहान, खेल मैदान, श्मशान भूमि और पंचायत भवन जैसी सार्वजनिक संपत्तियों पर यादव और मुस्लिम समुदाय द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। इन कब्जों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। यह आदेश बलिया के सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) और प्रशासनिक अधिकारियों को भेजा गया था। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रदेश की 57,691 ग्राम पंचायतों में इस तरह के कब्जे हैं।
जैसे ही मामला उजागर हुआ, योगी सरकार ने दिखाई सख्ती
जब यह मामला सार्वजनिक हुआ और सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने साफ कहा कि सरकार की नीतियां जाति या धर्म के आधार पर नहीं चलाई जा सकतीं। सीएम ने आदेश को संविधान विरोधी बताया और ऐसे किसी भी भेदभावपूर्ण निर्देश को अस्वीकार्य करार दिया। मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश देते हुए न सिर्फ विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया, बल्कि पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक को निलंबित करने का भी आदेश दिया। बलिया के डीपीआरओ अवनीश कुमार पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम समाज की जमीनों पर अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन इसमें किसी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। सभी के साथ समान व्यवहार होगा। बलिया से उठे इस विवाद ने साबित कर दिया कि योगी सरकार किसी भी भेदभावपूर्ण नीति को बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार का साफ संदेश है अवैध कब्जा हटाना जरूरी है, लेकिन संविधान के दायरे में रहकर, बिना जाति-धर्म का भेद किए।





