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Wednesday, March 18, 2026
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उप राष्ट्रपति या BJP अध्यक्ष बनना चाहेंगे? मनोहर लाल ने दिया चौंकाने वाला जवाब, धनखड़ मामले पर भी बोले

मनोहर लाल खट्टर ने उप राष्ट्रपति या बीजेपी अध्यक्ष बनने के सवाल का बड़ी बेबाकी से जवाब दिया है। उन्‍होंने उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर भी अपनी बात रखी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई सवालों के बेझिझक जवाब दिए। जब उनसे पूछा गया कि वे उप राष्ट्रपति और बीजेपी अध्यक्ष इन दोनों में से किस पद को लेना पसंद करेंगे, तो उन्होंने हैरान कर देने वाला जवाब देते हुए कहा, “दोनों में से कोई नहीं।” हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता खट्टर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं पद नहीं चुनता। जो जिम्मेदारी पार्टी मुझे देती है, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाता हूं।” इस बात को और स्पष्ट करने के लिए उन्होंने एक किस्सा भी साझा किया।

हरियाणा के पूर्व सीएम ने साझा किया एक किस्सा

मनोहर लाल खट्टर ने अपनी पहली जिम्मेदारी को याद करते हुए बताया कि उन्हें पहली जिम्मेदारी 1980 में फरीदाबाद में मिली थी। फिर 1981 में जिला प्रचारक उनसे मिलने आए। दो दिन की बैठकें हुईं। इसके बाद जब वे लौटने लगे तो उन्होंने बस स्टैंड तक साथ चलने को कहा।

बस में चढ़ते वक्त उन्होंने एकदम से रुककर कहा, “मैं तो भूल ही गया, आपका तबादला रोहतक कर दिया गया है।” इस पर मैंने केवल इतना ही कहा, “ठीक है।” खट्टर ने आगे बताया, “मुझे यह पूछने की जरूरत नहीं लगी कि ‘रोहतक ही क्यों?’ जब भी मुझे कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है, मैं उसे सहजता से स्वीकार करता हूं। मेरे लिए कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अगर मैं उपराष्ट्रपति या बीजेपी अध्यक्ष नहीं भी बनता, तो भी करने के लिए बहुत काम हैं। मैं कुछ नया कर लूंगा।”

खट्टर ने धनखड़ मामले पर भी दी प्रतिक्रिया

उप राष्ट्रपति और नए बीजेपी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि दोनों पदों पर नए दायित्व संभालने वाले नेता साल के अंत से पहले नियुक्त कर दिए जाएंगे। हालांकि, जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के चलते उप राष्ट्रपति पद पर नियुक्ति तय समय सीमा से पहले ही की जाएगी। जब उनसे धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल किया गया, तो खट्टर ने कहा कि उन्होंने विपक्ष से प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जबकि सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं थी। यह पूरी तरह से सरकार की रणनीति का हिस्सा था। इस विशेष मामले को लेकर उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति पर अनुशासनहीनता के आरोप भी लगाए और कहा कि ऐसी स्थिति में यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

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