नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। वे 19 फरवरी से अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, इस नियुक्ति पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका का हवाला दिया है।
कौन हैं ज्ञानेश कुमार?
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। वे पहले गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन में अहम भूमिका निभाई थी। मई 2022 में वे यूनियन कोऑपरेशन सेक्रेटरी बने और जनवरी 2024 में रिटायर हुए। मार्च 2024 में उन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया और अब वे मुख्य चुनाव आयुक्त बन गए हैं।
कांग्रेस क्यों कर रही है विरोध?
कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने जल्दबाज़ी में यह नियुक्ति की है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि नए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन निष्पक्ष नहीं है, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती दी गई है और उसकी सुनवाई 19 फरवरी को होनी है।कांग्रेस का कहना है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस बैठक से बाहर निकल गए थे और उन्होंने अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
कैसे होता है मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन?
CEC पहले सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते थे। सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले के अनुसार, चयन पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। केंद्र सरकार ने नया कानून लाकर मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को पैनल में शामिल कर दिया। इस नए कानून के तहत पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन हुआ है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रहना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई होने वाली है, जिसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा। उनके कार्यकाल में 20 विधानसभा चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव होगा। साथ ही 2027 में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर होगी। कांग्रेस के विरोध के बावजूद सरकार ने यह नियुक्ति कर दी है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस मामले में अहम भूमिका निभा सकता है।




