नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भाजपा के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय को इंदौर नगर निगम के एक अधिकारी को बल्ले से पीटने के आरोप से बरी कर दिया गया है। 9 सितंबर 2024 को एमपी एमएलए कोर्ट ने भाजपा के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के अलावा अन्य 9 आरोपियों को भी इस मामले में दोषमुक्त करार दिया है। इस मामले में एक आरोपी मोनू कल्याणे की पहले ही हत्या हो चुकी है। बता दें कि पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय मध्य प्रदेश के बड़े भाजपा नेता और ताकतवर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं।
यह नहीं देख पाए की उन्हे बल्ले से चोट किसने मारी
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय शिकायतकर्ता इंदौर नगर निगम के अधिकारी धीरेंद्र बायस के कारण ही इस मामले में बरी हुए हैं। इंदौर नगर निगम के अधिकारी धीरेंद्र बायस ने एमपी एमएलए कोर्ट में सुनवाई के दौरान बयान दिया कि जब उन्हें बल्ले से चोट लगी थी तो वह उस वक्त मोबाइल से बात कर रहे थे और बातचीत में व्यस्त होने की वजह से यह नहीं देख पाए की उन्हे बल्ले से चोट किसने मारी।
उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी
बता दें कि इंदौर नगर निगम के अधिकारी धीरेंद्र बायस ने ही 26 जून 2019 को तत्कालीन भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय और 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ उन्हें बल्ले से पीटने का मामला दर्ज कराया था। धीरेंद्र बायस इंदौर नगर निगम के भवन निरीक्षक थे, उस समय तत्कालीन भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय इंदौर के गंजी कंपाउंड इलाके में एक जर्जर मकान को गिराए जाने के मामले में इंदौर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। तत्कालीन भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय की तभी नगर निगम के अधिकारियों के साथ बहस हो जाती है और वह गुस्से में क्रिकेट के बल्ले से इंदौर नगर निगम के भवन निरीक्षक धीरेंद्र बायस को चोट पहुंचा देते हैं। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।
भाजपा के पूर्व विधायक और 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ इस मामले को लेकर इंदौर के एमजी रोड थाने में धारा 353, 294, 323, 506, 147 और 148 के तहत मामला दर्ज किया गया था।




