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Monday, March 16, 2026
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अरुण जेटली का छात्र संघ से भारतीय राजनीति में आने के पीछे का क्या था कारण?

Arun Jaitley: इसके बाद अरुण जेटली ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की जिम्मेदारी संभालने के साथ साथ बीजेपी में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज 24 अगस्त को पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की पुण्यतिथि है। अरुण जेटली भारतीय जनता पार्टी ही नहीं बल्कि विपक्ष में भी काफी लोकप्रिय थे। अरुण जेटली को उनके कार्यों की वजह से यह लोकप्रियता मिल पाई थी। वित्त मंत्री रहते हुए उनके कार्यों को खूब सराहा गया। पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी। यह बात खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन के बाद कही थी। दोनों बड़े नेताओं के बीच दोस्ती का यह रिश्ता काफी खास था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के राजनीतिक प्रतिभा और अनुभव को सराहा।

अरुण जेटली को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया था

बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का छात्र नेता से लेकर राजनीति तक का सफर इतना आसान नहीं था। अरुण जेटली आपातकाल के समय में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत में 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया था। जिसका पूरे देश में काफी विरोध हुआ था। वहीं अरुण जेटली ने भी एक छात्र नेता के रूप में इस आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाई थी। अरुण जेटली ने उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के दफ़्तर के सामने 200 छात्रों को एकत्रित किया और जोरदार भाषण दिया। यहीं नहीं उन्होंने आपातकाल का विरोध करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का एक पुतला भी जला दिया था। अरुण जेटली को इस घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। अरुण जेटली को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया था।

उन्होंने निर्णय ले लिया था कि वह राजनीति को ही अपना करियर बनाएंगे

तिहाड़ जेल में उनके साथ अटलबिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी समेत अन्य 12 राजनीतिक कैदी रह रहे थे। उन्हें तिहाड़ जेल में पूरे 19 महीने कैद रहना पड़ा था। लेकिन जब अरुण जेटली जेल से बाहर आए तो उन्होंने निर्णय ले लिया था कि वह राजनीति को ही अपना करियर बनाएंगे। इसके बाद अरुण जेटली को जनता पार्टी के प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गयी और उन्हें गठित लोकतांत्रिक युवा मोर्चा का राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया। वहीं जब वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तो अरुण जेटली भी इसमें शामिल हो गए। 

इसके बाद अरुण जेटली ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा

वहीं अरुण जेटली ने 80 के दशक में अपनी वकालत की प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने ट्रायल कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया। वह एक वरिष्ठ वकील बन गए थे। अरुण जेटली 37 वर्ष की उम्र में ही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बन गए थे। इसी दौरान अरुण जेटली की शादी संगीता से हुई, जो गिरिधर लाल डोगरा और शकुंतला डोगरा की बेटी थी।

24 अगस्त 2019 को हो गया था निधन

वर्ष 1983 को अरुण जेटली के घर में उनकी बड़ी बेटी सोनाली का जन्म होता है, जो इस समय एक वकील हैं। वहीं वर्ष 1989 में अरुण जेटली के बेटे रोहन का जन्म हुआ। इसके बाद अरुण जेटली ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की जिम्मेदारी संभालने के साथ साथ बीजेपी में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। उनके कार्यों के दम पर ही उन्हें बीजेपी ने आगे चलकर वित्त मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारी दी, जिनको उन्होंने बखूबी निभाया। वहीं अरुण जेटली का 24 अगस्त 2019 को निधन हो गया था।

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