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Wednesday, March 11, 2026
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किसी महिला को सोशल मीडिया पर गलत लिखा तो जाना पड़ सकता है जेल, मुबंई हाईकोर्ट ने क्या-क्या कहा? यहां देखें…

मुबंई हाई कोर्ट ने कहा कि महिला को आधुनिक तकनीक से आपत्तिजनक टिप्पणी हो रही है या कोई ईमेल सामने आता है। तो कोर्ट अपराधी को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ सकता कि अपमान बोला नहीं गया है बल्कि लिखित है।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह का पोस्ट या ईमेल जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है अपराध के तहत आता है। ऐसा मुबंई हाई कोर्ट (Mumbai High Court) ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दोरान कहा है। कई बार लोग बिना सोचे समझे सोशल मीडिया पर महिलाओं को ऐसे शब्द लिख देते है। जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है या फिर उनको जलील करता है। सोशल मीडिया पर लोगों को अफसोस तक नहीं होता और उनको लगता है कि उन्होंने जो कहा है वहीं सही है। लेकिन इसके खिलाफ जस्टिस A.S Gadkari और नीला गोखले की बेंच ने कहा कि ईमेल और सोशल मीडिया पर लिखे गए शब्द जिसमें किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचता है वो IPC की धारा 509 के तहत अपराध है। 

महिला ने अपमानजनक Email की शिकायत की थी 

ये मामला 2009 का है जिसमें एक महिला ने शिकायत की थी की South Mumbai/दक्षिण मुबंई की एक सोसायटी में रहने के दौरान एक शख्स ने उस महिला को आपत्तिजनक और अपमानभरे ईमेल लिखे थे और महिला के चरित्र को लेकर गलत टिप्पणीयां की थी। महिला ने बताया कि वो ईमेल उस सोसायटी के बाहर भी भेजी गई थी। इस मामले में आरोपी के खिलाफ IPC धारा 509 के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। 

बदला लेने के लिए किया गया FIR: अपराधी के वकिल का तर्क 

आरोपी ने 2011 में उसपर किए गए केस को खारिज करने की मांग की थी। आरोपी के वकील हरेश जगतियानी ने तर्क में बोला की ये शब्द महिला से बोले ही नहीं गए थे और ये दुश्मनी या बदला लेने के लिए उसपर ये FIR दर्ज करवाई है। मगर महिला के वकील ने दुश्मनी की बात से इनकार कर दिया था। 

गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्द अपराध है- मुबंई HC 

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने कहा कि जो ईमेल महिला को भेजा गया उसमें महिला कि गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। साथ ही ये महिला कि छवि और प्रतिष्ठा को कम करने के मकसद से भेजी गई है। 

कोर्ट का इस मामले पर कहना 

कोर्ट ने कहा है कि आधुनिक तकनीक से अपमान करने के कई तरीके आ चुके हैं। अगर किसी महिला पर आपत्तिजनक टिप्पणयां हो रही है या कोई ईमेल सामने आता है तो कोर्ट अपराधी को सिर्फ इसलिए नहीं छेड़ सकते कि अपमान बोला नहीं गया है बल्कि सोशल मीडिया पर लिखित है। 

कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस तरह कि एक्टिविटी लोग किसी महिला को बदनाम और उसका अपमान करने के लिए ईमेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं और सोचते हैं कि बिना किसी परिणाम के बचकर निकल जाएंगे। 

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