नई दिल्ला, रफ्तार न्यूज। दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास जिसे BJP ने शीशमहल का नाम दिया है एक बार फिर से सुर्खियों में है। शीशमहल को लेकर अब उपराज्यपाल से शिकायत की गई है आवास खाली करते समय सोने की परत वाला कमोड और बेसिन अरविंद केजरीवाल इसे अपने साथ ले गए हैं।
सोने का कमोड कहां है?
दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर शिकायत की है कि PWD (लोक निर्माण विभाग) के डॉक्यूमेंट्स बताते है कि अप्रैल 2022 के बाद सीएम आवास में कोई काम नहीं हुआ तो फिर शीशमहल में बेशुमार सुविधाएं कहा से आईं है। पत्र में विजेंद्र गुप्ता ने उच्च स्तरीय की जांच करने की मांग की है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि आवास में सोने की परत वाला कमोड और बेसिन भी का खुलासा हुआ है जिसको लेकर शिकायत है कि केजरीवाल आवास खाली करते समय इसे साथ ले गए थे। विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि अप्रैल 2022 में जब सरकारी आवास को पीडब्ल्यूडू ने नए सिरे से बनाकर हैंडओवर किया उस वक्त जो सामान लगा हुआ था वह बहुत कम है।
गोल्ड प्लेटेड कमोड के साथ शानदार जिम और टीवी की जांच
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि गोल्ड प्लेटेड कमोड के अलावा जिम का भी सामान था जो की दिखाई नहीं दिया। 2024 में शीशमहल में सेकेंड फ्लोर पर एक आलीशान जिम बनाया गया था, 28 लाख का टीवी के साथ गोल्ड प्लेटेड कमोड और वॉश बेसिन लगाया गया था यह सब कहा से आया? पीडब्ल्यूडी के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक यह सारे सामान नहीं दिया। जब 2022 से 2024 के बीच केजरीवाल वहां रह रहे थे तो किसने उनके सरकारी आवास को सजाने के लिए करोड़ो पैसे खर्च किए? नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस पूरे मामले की जांच कराने के लिए उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि वह लोग सामने आने चाहिए जिन्होंने शीशमहल पर करोड़ो रुपये खर्च किए है।
क्या हैं पूरा मामला ?
यह मामला अब पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि शराब घोटाले में जो रिश्वत ली गई उसका एक हिस्सा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास शीशमहल में महंगी चीजों पर खर्च किया गया। जब पीडब्ल्यूडी ने इस सरकारी आवास की इन्वेंटरी की जांच की तो उन्होंने पाया कि अप्रैल 2022 के बाद विभाग ने कोई नया सामान नहीं भेजा था। लेकिन इस दौरान जब केजरीवाल इस आवास में रह रहे थे तब वहां महंगे टीवी सेट और अन्य सजावट की चीजें लगाई गई थीं। अब सवाल यह उठता है कि ये महंगी चीजें कहां से आईं और कौन से लोग इस मामले में शामिल थे। इसके बदले में क्या फायदा दिया गया यह भी जांच का विषय है।





