नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लेबनान और सीरिया के कुछ इलाकों पर 17 सितंबर 2024 को हुए पेजर ब्लास्ट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में सभी लोग पेजर के बारे में ये भी जानना चाहते हैं कि यह भारत में कब आया और किस कारण से यह भारतीय बाजार से गायब हो गया? भारत में पेजर को BPL समेत कई अन्य कंपनियों ने वर्ष 1995 में लॉन्च किया था। लेकिन भारत में पेजर की प्रसिद्धी 2000 और 2002 के आसपास काफी बढ़ गयी थी। भारत में बिजनेसमैन पेजर का बड़ी संख्या में इस्तेमाल करने लगे थे। पेजर एक बहुत ही छोटा कंम्यूनिकेशन डिवाइस होता है, जो विशेष रूप से मैसेज भेजने और रिसीव करने के लिए ही प्रयोग किया जाता है। पेजर को बीपर के नाम से भी जाना जाता है।
मोबाइल के आ जाने से पेजर की लोकप्रियता फीकी पड़ती रही
पेजर में मैसेज भेजने के लिए एक प्रक्रिया को फॉलो करना पड़ता है, जिसके लिए एक नंबर पर कॉल किया जाता है और पेजर नंबर बताकर मैसेज भेजा जाता था। लेकिन धीरे धीरे भारत में मोबाइल के आ जाने से पेजर की लोकप्रियता फीकी पड़ती रही। जिसके बाद से भारत में पेजर की डिमांड कम होती रही और एक समय ऐसा आया कि यह भारतीय बाजार से पूरी तरह गायब हो गया। मोबाइल से मेसेज ही नहीं बल्कि कॉल आदि सभी बड़ी आसानी से हो जाया करता था। यही कारण है कि पेजर का इस्तेमाल भारत में पूरी तरह से बंद हो गया था।
दुनिया का सबसे पहला पेजर वर्ष 1921 में बनाया गया था
बता दें कि दुनिया का सबसे पहला पेजर वर्ष 1921 में बनाया गया था। अमेरिका ने इस पेजर का सबसे पहले इस्तेमाल अपनी Detroit Police डिपार्टमेंट के लिए ही किया था। इसके बाद Motorola पेजर में कुछ बेहतर तकनीक लाकर पहला मॉडर्न पेजर वर्ष 1959 को लेकर आया। जिसका नाम Pageboy I रखा गया था। इसमें यूजर्स को नोटिफाई की सुविधा थी। इसके बाद पेजर में और अधिक तकनीक का प्रयोग किया गया और फिर दोनों तरफ कम्युनिकेशन के लिए इसे तैयार किया गया। जिसकी सहायता से यूजर्स मैसेज सेंड और रिसीव कर सकते थे।




