नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। 2 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती मनाई जा रही है। गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने अपने जीवनभर सत्य, अहिंसा और सादगी को अपनाया और देश को आजादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। इस दिन पूरे भारत में स्वच्छता अभियान, भाषण, पोस्टर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह
भारत लौटने के बाद गांधीजी ने अपने गुरु जैसे नेता गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह मानी। गोखले ने कहा था कि उन्हें पहले एक साल तक भारत घूमकर देश, समाज और लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए। गांधीजी ने ऐसा ही किया और देश की जमीनी हकीकत से खुद को जोड़ा।
किसानों की बात, अमीरों को आईना
गांधीजी ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर 6 फरवरी 1916 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के उद्घाटन समारोह में भाषण दिया। यह कार्यक्रम राजाओं, जमींदारों और बड़े दानदाताओं की मौजूदगी में हुआ था। लेकिन गांधीजी ने मंच से अमीर वर्ग की आलोचना की और गरीबों की हालत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “भारत की मुक्ति तब तक संभव नहीं जब तक आप इन अलंकरणों को त्यागकर अपने हमवतनों की भलाई में न लगाएं। स्वराज का कोई अर्थ नहीं है अगर हम किसानों से उनके श्रम का पूरा लाभ छीनते रहेंगे। हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से हो सकती है। न वकील, न डॉक्टर, न जमींदार इसे सुरक्षित रख सकते हैं।
आजादी के सफर का उद्घोष
बीएचयू का यह भाषण गांधीजी का पहला बड़ा राजनीतिक संदेश था। यह वही लम्हा था जब उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ नहीं बल्कि भारतीय समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय के खिलाफ भी होगी। यही विचार आगे चलकर उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा चेहरा बना गया।




