नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार का दिन बेहद दुखद रहा। राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का चार्टर्ड विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार समेत कुल पाँच लोगों की मौत हो गई। मुंबई से बारामती जा रहे अजित पवार का यह हादसा न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम जनता में भी भारी शोक पैदा कर गया।
बारामती विमान हादसा: DGCA की पुष्टि, अजित पवार सहित 5 की मौत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड विमान रनवे से फिसलकर पास के खेत में जा गिरा और उसमें आग लग गई। DGCA की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी यह पुष्टि हुई है कि बारामती में लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस हादसे में विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हुई है, जिनमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी शामिल हैं।
बारामती चुनाव प्रचार के बीच हादसा, इलाके में मची अफरा-तफरी
बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान जिला परिषद चुनाव प्रचार के सिलसिले में बारामती जा रहा था। लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गए। सोशल मीडिया पर भी हादसे की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें विमान के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने का दृश्य साफ दिख रहा है।
राजकीय शोक क्या होता है?
अजित पवार के निधन के चलते महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। राजकीय शोक का मतलब है कि सरकार किसी प्रमुख व्यक्ति के निधन पर आधिकारिक रूप से शोक प्रकट करती है, जो पूरे राज्य या देश में लागू हो सकता है। इस दौरान सरकारी भवन, सचिवालय और प्रमुख कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहता है, कोई सरकारी समारोह, उत्सव या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते, और मनोरंजन से जुड़े सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं। केवल जरूरी और आवश्यक सरकारी काम ही जारी रहते हैं। हालांकि, स्कूल, कॉलेज या निजी दफ्तर आमतौर पर खुल सकते हैं। राजकीय शोक के नियमों का उल्लंघन करने पर प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
राजकीय शोक के दौरान लागू प्रतिबंध
राजकीय शोक की अवधि सरकार तय करती है और इस दौरान कई विशेष नियम लागू होते हैं। सबसे पहले, सरकारी भवनों, सचिवालय, विधानसभा और अन्य प्रमुख कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहता है। इसके अलावा, कोई भी सरकारी समारोह, उत्सव या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते और मनोरंजन से जुड़े सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं। इस दौरान केवल जरूरी और आवश्यक सरकारी काम ही जारी रहते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि स्कूल, कॉलेज या सामान्य दफ्तर भी बंद किए जाएं; उनका संचालन नियमित रूप से जारी रह सकता है।
राजकीय शोक में छुट्टी का नियम
भारत सरकार के 1997 के नियमों के अनुसार, राजकीय शोक के दौरान सार्वजनिक छुट्टी अनिवार्य नहीं होती। आमतौर पर छुट्टी सिर्फ तब दी जाती है जब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का निधन पद पर रहते हुए होता है। हालांकि, राज्य सरकारें अपने स्तर पर निर्णय ले सकती हैं और चाहें तो स्कूल, कॉलेज या सरकारी दफ्तरों में राजकीय शोक के दौरान छुट्टी घोषित कर सकती हैं। यह पूरी तरह राज्य सरकार की योजना और आदेश पर निर्भर करता है।
राजकीय शोक में नियम तोड़ने पर सजा
राजकीय शोक के दौरान फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज को आधा न झुकाए, प्रतिबंधित समारोह या कार्यक्रम आयोजित करे, या सरकारी आदेशों की अवहेलना करे, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जुर्माना या अन्य सजा लागू हो सकती है। यह सुनिश्चित करता है कि शोक के समय सम्मान और अनुशासन बना रहे।





