नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पिछले 16 महीने से मणिपुर धधक रहा है। राज्य में लगातार हो रही हत्याओं, लूट और आगजनी से आम लोगों में दहशत का माहौल है। 3 मई 2023 से शुरू हुई हिंसा पर अभी तक ब्रेक नहीं लग पाया है। ताजा मामला मणिपुर के जिरीबाम जिले का है। जहां पर शनिवार को हुई हिंसा में 5 लोगों की मौत हो गई थी। मणिपुर में हो रही हिंसा के सामने सुरक्षाबल भी बेबस नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहा कि मणिपुर में आखिर 16 महीनों से चल रही हिंसा पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है? सबसे पहले ये समझते हैं कि आखिर ये हिंसा शुरू कैसे हुई?
कौन हैं कुकी और मैतेई?
पूर्वोत्तर भारतीय राज्य मणिपुर बांग्लादेश के पूर्व में स्थित है और इसकी सीमा म्यांमार से भी लगती है। इस स्टेट की अनुमानित जनसंख्या 33 लाख के करीब है। इनमें से लगभग आधे लोग मैतेई समुदाय से हैं जो विशेषकर हिंदू मत को मानने वाले होते हैं। मैतेई मणिपुर की घाटियों में रहने वाले लोग होते हैं। वहीं लगभग 43% कुकी और नागा जनजाती के लोग हैं। कुकी ज्यादातर ईसाई होते हैं। कुकी और नागा मुख्यत: पहाड़ों पर रहते हैं।
हिंसा क्यों हुई शुरू?
मैतेई, कुकी और नागा मिलिशिया सालों से परस्पर विरोधी मातृभूमि की मांगों और धार्मिक कारणों को लेकर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं, लेकिन इस बार संघर्ष के मूल में धर्म नहीं बल्कि जातीयता है। दरअसल मणिपुर में मैतेई समाज मांग कर रहा था कि उन्हें भी कुकी की तरह राज्य में शेड्यूल ट्राइब (ST) का दर्जा दिया जाए। मणिपुर में हालात तब खराब हो गए जब कुकी समुदाय ने मैतेई समुदाय के इस मांग का विरोध करना शुरू कर दिया।
कुकी का तर्क था कि अगर मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा मिल गया तो सरकार और समाज पर उनका प्रभाव और अधिकार और मजबूत हो जाएगा। इससे वो जमीन खरीदकर कुकी क्षेत्रों में बसने लगेंगे। कुकियों का कहना है कि मैतेई के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा नशीली दवाओं के खिलाफ छेड़ा गया युद्ध उनके समुदाय को उखाड़ फेंकने का एक बहाना है। वहीं म्यांमार से हो रहे अवैध पलायन ने मणिपुर के तनाव को और बढ़ा दिया है। जिसके बाद मणिपुर में 3 मई 2023 को हिंसा की शुरुआत हुई।
आधुनिक हथियार बन रहे संकट
मणिपुर में हालात पिछले साल मई से खराब है। हालांकि पिछले कुछ महीनों से स्थिति नियंत्रण में थी, लेकिन अब एक बार फिर मणिपुर में हिंसा शुरू हो गई है। जिसमें 5 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। मणिपुर में इस समय हो रही हिंसा को रोकने में सुरक्षाबल नाकाम हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दोनों पक्षों के पास आधुनिक हथियार का होना है। दोनों पक्ष अब हवाई बमबारी, RPG और अत्याधुनिक हथियारों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। ताजा हमले को लेकर पुलिस ने जांच की तो पुलिस को 7.62 मिमी स्नाइपर राइफल, पिस्टल, इम्प्रोवाइज्ड लॉन्ग रेंज मोर्टार(पोम्पी), इम्प्रोवाइज्ड शॉर्ट रेंज मोर्टार, ग्रेनेड, हैंड ग्रेनेड जैसे आधुनिक हथियार मिले।
कहां से आए आधुनिक हथियार?
सुरक्षाबलों को आधुनिक हथियारों से निपटने में परेशानी हो रही है। पर सबसे बड़ा सवाल ये पैदा हो रहा है कि दोनों पक्षों के पास इतने आधुनिक हथियार कहां से आए। जिन हथियारों का इस्तेमाल युद्ध में किया जाता है या फिर जवानों के द्वारा किया जाता है। वो हथियार इनके पास कैसे आए? दरअसल पिछले दिनों मणिपुर में सेना के जवानों समेत पुलिस के कई थानों में लूट की गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों की लूट की गई है।
इसके अलावा दूसरा आरोप ये भी है कि अवैध हथियारों की सप्लाई हो रही है। इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने चिंता जाहिर की है। आरोप लगाया जा रहा है कि पड़ोसी देशों से मणिपुर में अवैध हथियारों की सप्लाई की जा रही है। जिससे हिंसा भड़क रही है।
क्या कर रही है सेना?
हिंसा को रोकने के लिए मणिपुर में हजारों सैनिकों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। लेकिन फिर भी हिंसा रूक नहीं पा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण आपसी समन्वय में कमी को बताया जा रहा है। इसको लेकर लोगों ने भी जवानों की तैनाती पर नाराजगी जाहिर की थी। वहीं राज्य की पुलिस में कुकी और मैतेई दोनों समुदायों के लोग शामिल होते हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस भी अब दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। जिसकी वजह से हिंसा पर लगाम नहीं लग पा रही है।
CM बीरेन सिंह पर लगा पक्षपात का आरोप
मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर सीएम बीरेन सिंह पर भी विपक्ष लगातार हमला कर रहा है। विपक्ष का कहना है बीरेन सिंह पक्षपात कर रहे हैं। बीरेन सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं। जो मणिपुर में काफी प्रभावशाली है। ऐसे में उनपर आरोप लग रहे हैं कि वो मैतेई समुदाय को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं। इसलिए कुकी समुदाय के द्वारा पिछले दिनों बीजेपी के कई नेताओं को निशाना बनाया गया। वहीं ताजा हिंसा मामले में भी मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर आरोप लगे।




