नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पहले द रेजिस्टेंस फ्रंट यानी टी.आर.एफ. ने कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। लेकिन अब टीआरएफ ने यू-टर्न लेते हुए कहा है कि हमने हमला नहीं किया। हमले की जिम्मेदारी लेने वाला पोस्ट हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया गया था और यह अनधिकृत था। हम इसकी जांच कर रहे हैं। टीआरएफ ने यह भी दावा किया है कि हमारे प्लेटफॉर्म से हम पर हमला किया गया है, इस पोस्ट के पीछे भारतीय एजेंसियों का हाथ है।
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। कुछ आतंकवादियों के घर नष्ट कर दिए गए हैं। भारत ने पाकिस्तान को भी सबक सिखाया है क्योंकि आतंकवादियों की आपूर्ति पाकिस्तान द्वारा की जा रही है। सिंधु संधि रद्द करने से पाकिस्तान को मिलने वाली पानी की आपूर्ति बंद हो जाएगी। इससे अब पाकिस्तान दुविधा में पड़ जाएगा। इस बीच, पहलगाम हमले को लेकर टीआरएफ ने हाथ खड़े कर दिए हैं। टीआरएफ ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि पहलगाम हमले से हमारा कोई संबंध नहीं है। यह भी कहा गया है कि हमारे डिजिटल प्लेटफॉर्म को हैक कर लिया गया और फिर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक अनधिकृत पोस्ट डाली गई।
TRF ने क्या कहा ?
पहलगाम हमले के बाद लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी कमांडर सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया था। उन्होंने आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था। टीआरएफ ने भारतीय जांच एजेंसियों पर साजिश का आरोप लगाया है। टीआरएफ ने यह भी कहा है कि हम इसकी जांच कर रहे हैं। अपने पोस्ट में टीआरएफ ने दावा किया कि 2000 में भारतीय सुरक्षा बलों पर हमला, 2001 में संसद पर हमला और 2019 में पुलवामा हमला सभी राजनीतिक लाभ के लिए थे।
टीआरएफ ने कहा कि द रेजिस्टेंस फ्रंट एक स्थानीय, वैचारिक जिहादी आंदोलन है। हम अपनी मातृभूमि पर हो रहे अत्याचारों को रोकने और उसे दुश्मन से मुक्त कराने के लिए लड़ रहे हैं। हम आँख मूंदकर हिंसा को पुरस्कृत नहीं करते। इस पत्र में टीआरएफ ने यह हास्यास्पद दावा भी किया है कि हमारी गतिविधियां ईमानदारी, नैतिकता और न्याय पर आधारित हैं।




