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Wednesday, April 1, 2026
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“हमें अपने संविधान पर गर्व है” नेपाल के बिगड़े हालातों पर CJI गवई ने जताई गहरी चिंता

CJI बी.आर. गवई ने नेपाल में उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्‍होंने कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता पर चिंता जताते हुए भारत के संविधान की स्थिरता और मजबूती की सराहना की है। सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ, जो राष्ट्रपति और राज्यपालों के अधिकारों से जुड़े एक संवैधानिक मामले की सुनवाई कर रही थी, उस दौरान CJI ने यह टिप्पणी की। उन्‍होंने कहा कि “हमें अपने संविधान पर गर्व है। अगर हम अपने पड़ोसी देशों की ओर देखें, तो वहां की परिस्थितियां कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। नेपाल में जो कुछ हो रहा है, वह चिंताजनक है।” इस टिप्पणी के दौरान पीठ में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ ने भी कहा कि बांग्लादेश में भी इसी तरह की संवैधानिक चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। 

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई नेपाल की आधिकारिक यात्रा पर गए थे। इस दौरान उन्होंने नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश मानसिंह राउत से शिष्टाचार मुलाकात की। अपनी यात्रा के दौरान CJI गवई ने लुंबिनी भगवान बुद्ध की पावन जन्मस्थली का भी दौरा किया, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और दीप प्रज्वलित कर विश्व शांति की कामना की।

नेपाल में युवाओं ने अब राजनीतिक-सामाजिक सुधारों की मांग की 

नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से हटाने के बाद भी युवाओं का आक्रोश थमा नहीं है। अब ये प्रदर्शनकारी व्यापक राजनीतिक और सामाजिक सुधारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। युवाओं के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक ढांचे में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में कथित रूप से भ्रष्ट राजनीतिक नेतृत्व द्वारा लूटी गई राष्ट्रीय संपत्ति की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। आंदोलन के आयोजकों ने यह भी ऐलान किया है कि प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उन्हें राज्‍य द्वारा शहीद का दर्जा दिया जाए। साथ ही उनके परिवारों को सरकारी सहायता, सम्मान और औपचारिक मान्यता देने की भी मांग की गई है। 

नेपाल के युवा नेताओं का संकल्प

नेपाल में जारी युवा आंदोलन अब केवल विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका स्वरूप एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक बदलाव की दिशा में बढ़ चुका है। आंदोलन से जुड़े युवा नेताओं ने देश में बढ़ती बेरोजगारी, जनसंख्या के लगातार हो रहे प्रवास, और सामाजिक अन्याय के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने का वादा किया है। नेताओं ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य लोकतंत्र को मज़बूत करना और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। प्रदर्शनकारियों द्वारा जारी बयान में कहा है कि “यह आंदोलन किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं है। यह पूरे राष्ट्र, हमारी पीढ़ी और आने वाले भविष्य के लिए है।” युवाओं ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि स्थायी शांति केवल एक नई, न्यायपूर्ण और जवाबदेह राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना से ही संभव है।

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