नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। उत्तराखंड देश की पहली ‘योग नीति’ लागू करने जा रहा है। यह देश का पहला राज्य होगा जहां योग जैसे विषय पर एक विस्तृत नीति पर काम होता हुआ दिखाई देगा। यह कहना है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देश की ‘पहली योग नीति’ को लागू करने के लिए काम कर रही है। योग नीति बड़े पैमाने पर आयुर्वेद और योग को एक साथ लाकर स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं हेल्थ एक्सपो-2024 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सम्मेलन आपसी ज्ञान साझा करने और विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों के साथ-साथ आयुर्वेद के क्षेत्र में सहयोग और व्यापार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। उन्होंने आयुष के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी राज्य में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। वर्तमान में हमारे प्रदेश में 300 आयुष आधारित ‘आयुष्मान स्वास्थ्य केंद्र’ कार्यरत हैं।
राज्य के प्रत्येक जिले में 50 बेड के आयुष अस्पताल स्थापित
उन्होंने कहा, उत्तराखंड में आज ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से 70 से अधिक विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श प्रदान किया जा रहा है। अब प्रत्येक जिले में 50 बेड और 10 बेड के आयुष अस्पताल स्थापित किये जा रहे हैं। इसके अलावा सरकार प्रत्येक जिले में एक गांव को मॉडल आयुष गांव के रूप में स्थापित कर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आयुष उत्पादन, आरोग्य, शिक्षा, अनुसंधान एवं औषधीय पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखंड आयुष नीति’ लागू की है। इसके साथ ही राज्य सरकार आने वाले वर्षों में 50 नए योग और कल्याण केंद्र स्थापित करने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ आयुष टेली-कंसल्टेंट शुरू करने पर भी काम कर रही है।
धामी सरकार ने केन्द्र से अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दौरान यह भी बताया कि राज्य सरकार ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय से उत्तराखंड में एक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का अनुरोध किया है, यह संस्थान आयुर्वेद शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों का आह्वान करते हुए कहा कि हमें अपने पौधों के हिन्दी नामों के साथ-साथ अंग्रेजी नामों का भी प्रचार-प्रसार करना चाहिए। इससे स्थानीय जड़ी-बूटियों की वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हो जाएगी।
आयुर्वेद के ज्ञान एवं औषधीय संपदा की भूमि उत्तराखंड – CM धामी
उनका कहना है कि ‘किल्मोड़ा’ को हम पहाड़ों में तो जानते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इसका अंग्रेजी नाम ‘बेरीबेरिस’ नहीं जानते, जबकि इस नाम को पूरी दुनिया जानती है और इससे दवाइयां बनती हैं। अत: अंग्रेजी नाम का भी प्रचार किया जाना चाहिए। देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही आयुर्वेद के ज्ञान एवं औषधीय संपदा की भूमि है। हमारे राज्य में पाए जाने वाले औषधीय पौधों ने आयुर्वेद को स्वास्थ्य के मूल तत्व के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विश्व की अनूठी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है, जो प्राचीन काल से ही मानव सभ्यता के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती आ रही है। आयुर्वेद केवल जड़ी-बूटियों और औषधियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि आयुर्वेद जीवन जीने की एक विशेष कला है। यह हमें सही जीवनशैली के बारे में बताता है, इसका उद्देश्य केवल बीमारियों को ठीक करना नहीं है बल्कि इसका अंतिम लक्ष्य बीमारी को होने से रोकना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन’ और ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ जैसे विभिन्न कार्यक्रम आज शहर से लेकर गाँव तक स्वास्थ्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।




