नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि देश बहुसंख्यकों के हिसाब से चलेगा। विपक्ष जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहता है। इस बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जजों का जो रोस्टर जारी किया है, उसमे जस्टिस शेखर कुमार यादव के कामकाज में बड़ा बदलाव किया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में 16 दिसंबर, 2024 से लागू होने वाले नए रोस्टर के अनुसार जस्टिस शेखर कुमार यादव अब निचली अदालत से आने वाले मामलों के खिलाफ की गई अपीलों की ही सुनवाई कर सकेंगे।
अब अहम मामलों की सुनवाई नहीं कर सकेंगे जस्टिस शेखर यादव
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस शेखर कुमार यादव इलाहाबाद हाईकोर्ट में उन्ही केसों की सुनवाई कर सकेंगे, जो वर्ष 2010 से पहले कोर्ट में आए हों। अभी तक जस्टिस शेखर कुमार यादव रेप के मामलों में जमानत जैसे कई संवेदनशील मामलों की भी सुनवाई कर रहे थे। लेकिन अब इलाहाबाद हाई कोर्ट के 16 दिसंबर, 2024 से लागू होने वाले नए रोस्टर के अनुसार वह केवल निचली अदालत से आने वाले मामलों के खिलाफ की गई अपीलों की ही सुनवाई कर सकेंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोस्टर में यह बदलाव उस समय किया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से जस्टिस शेखर कुमार यादव के विवादित बयान को लेकर डिटेल रिपोर्ट मांगी है।
VHP के कार्यक्रम में की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव ने 8 दिसंबर 2024 को विश्व हिंदू परिषद की लीगल सेल के एक कार्यक्रम में विवादित टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा था कि देश का कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से चलेगा। यही नहीं उन्होंने अपने भाषण में कठमुल्ला जैसे शब्द का भी प्रयोग किया था। जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि भारत में जल्द ही समान नागरिक संहिता कानून भी लागू हो जाएगा। यह कानून बहुत ही जरूरी है।




