नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि देश बहुसंख्यकों के हिसाब से चलेगा। जस्टिस यादव का बयान 10 दिसंबर को अखबारों में पब्लिश हुआ, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया और इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी थी। अब विपक्ष जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। इस खबर के माध्यम से हम जानेंगे कि क्या जज को महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है।
क्या होता है महाभियोग?
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज को महाभियोग की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करके हटाया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 124(4) और अनुच्छेद 217 में महाभियोग को लेकर खुलकर लिखा हुआ है। यह प्रक्रिया काफी कठोर है। महाभियोग की इस प्रक्रिया को केवल जज के दुराचार (भ्रष्टाचार आदि) या कर्म-अक्षमता के आधार पर ही शुरू किया जा सकता है। अगर जज कोई मानसिक या शारीरिक स्तर की वजह से इस पद और कार्य के योग्य न हो उसको कर्म-अक्षमता कह सकते हैं।
महाभियोग की पूरी प्रक्रिया
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी एक सदन में पेश किया जा सकता है, ये सदन हैं लोकसभा और राज्यसभा। महाभियोग प्रस्ताव को पेश करने के लिए एक निश्चित संख्या में सांसदों का समर्थन चाहिए होता है। जिसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों का समर्थन चाहिए होता है और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों का समर्थन चाहिए होता है। तय सांसदों का समर्थन मिल जाने के बाद महाभियोग प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के स्पीकर महाभियोग प्रस्ताव की प्रारंभिक जांच के लिए एक जांच समिति का गठन करते हैं।
राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक जज, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक विशिष्ट विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं। यह जांच समिति जज के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की जांच करके अपनी रिपोर्ट सौंपती है। अगर जांच समिति की रिपोर्ट में जज के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाता है। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन के दो-तिहाई बहुमत की जरुरत होती है। यदि यह प्रस्ताव एक सदन में पारित हो जाता है, तो प्रस्ताव को दूसरे सदन में भेजा जाता है। अगर ये प्रस्ताव दोनों सदनों में पारित हो जाता है, तो प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने के बाद आरोपी जज को पद से हटा दिया जाएगा। बता दें कि महाभियोग प्रस्ताव के जरिए अभी तक किसी भी जज को नहीं हटाया गया है। लेकिन अगर विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करा लेते है तो इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव को उनके पद से हटाया जा सकता है।




