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Thursday, March 12, 2026
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IPS अफसर पर कार्रवाई की मांग, 100 दिन बाद भी खामोशी- गजेंद्र सिंह शेखावत की CM को चिट्ठी से बढ़ा सियासी दबाव

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आईपीएस अफसर नारायण टोगस के खिलाफ सीएम भजनलाल शर्मा को चिट्ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने अफसर नारायण टोगस के खिलाफ कारवाई की मांग की है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर अफसरशाही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर ग्रामीण के एसपी और आईपीएस अफसर नारायण टोगस के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चिट्ठी लिखकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन 100 दिन बीतने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

13 सितंबर को भेजी गई थी चिट्ठी

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 13 सितंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा था। यह चिट्ठी अब सार्वजनिक हुई है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके संसदीय क्षेत्र जोधपुर में तैनात एसपी ग्रामीण नारायण टोगस को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ी बैठकों के लिए कई बार बुलाया गया, लेकिन वह न तो बैठकों में पहुंचे और न ही किसी तरह की सूचना दी।

गंभीर लापरवाही का आरोप

चिट्ठी में शेखावत ने साफ लिखा कि किसी वरिष्ठ जनप्रतिनिधि की बैठक में बिना सूचना के अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने इसे जिम्मेदारी के प्रति उदासीन रवैया बताया और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े किए। इसी आधार पर आईपीएस अफसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई। यह चिट्ठी 18 सितंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्राप्त हुई थी। इसके बाद 23 सितंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से जवाब भी भेजा गया। जवाब में कहा गया कि संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि, इसके बावजूद 100 दिन से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी आईपीएस अफसर नारायण टोगस अपने पद पर बने हुए हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह मामला अकेला नहीं है। इससे पहले उदयपुर से बीजेपी सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने भी जिला कलेक्टर के रवैये को लेकर मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन उस पर भी अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बीजेपी की एक वर्कशॉप में अफसरों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि अफसरों को पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की बात सुननी होगी।

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