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Wednesday, March 11, 2026
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गृहयुद्ध का खतरा बताकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य की UGC कानून पर सख्त चेतावनी, सरकार को तुरंत वापस लेने का आह्वान

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने UGC कानून को समाज में विभाजन और गृहयुद्ध का कारण बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की चेतावनी दी है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बस्ती में रामकथा कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यूजीसी (UGC) कानून को लेकर केंद्र सरकार को सख्त चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह कानून लागू नहीं किया जा सकता और इसे तुरंत वापस लेना ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके धर्माचार्य रहते इस कानून को लागू करना अस्वीकार्य है। रामभद्राचार्य ने आगाह किया कि यदि सरकार इसे बिना व्यापक चर्चा और सहमति के लागू करती है, तो इससे समाज में विभाजन और भेदभाव बढ़ सकता है, जो देश के लिए गंभीर खतरे की घंटी है। उनका कहना है कि इस कानून के कारण समाज गृहयुद्ध जैसी स्थिति का सामना कर सकता है।

UGC गाइडलाइंस लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाया कि आखिर UGC गाइडलाइंस लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी और समाज में भेदभाव क्यों फैलाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहे हैं, और यह धर्म अपने इतिहास में सभी वर्गों के प्रति समानता का संदेश देता रहा है। उन्होंने समाज में कुछ ब्राह्मणों के मांस, मछली और शराब के सेवन की ओर भी इशारा किया और कहा कि ऐसे लोगों को जागरूक होना चाहिए। उनके अनुसार, बस्ती क्षेत्र का वशिष्ठ नगर होना आवश्यक है क्योंकि यह अपनी अध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण है।

”गुरु वशिष्ठ छुआछूत और भेदभाव के विरोधी”

रामभद्राचार्य ने महाभारत और गुरु वशिष्ठ के उदाहरण देकर बताया कि वशिष्ठ ने निषाद राज और अन्य राजकुमारों सहित सभी वर्गों को शिक्षा दी। उनका कहना था कि जो रामजी का है, वह सभी का है, और इसे छूने में कोई पाप नहीं है। गुरु वशिष्ठ हमेशा छुआछूत और भेदभाव के विरोधी रहे हैं और उनके आदर्श आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।

सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदना

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्पष्ट किया कि UGC की नई गाइडलाइंस केवल प्रशासनिक मसला नहीं हैं, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदनाओं को भी प्रभावित करती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में रोक लगा दी है। हालांकि, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग इसके समर्थन में हैं और कानून को लागू करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सवर्ण समाज में इस कानून के विरोध की व्यापकता देखने को मिल रही है।

सांस्कृतिक एकता और शांति को प्राथमिकता

रामभद्राचार्य का यह बयान केंद्र और राज्य सरकार के लिए गंभीर चेतावनी की तरह है। उनका कहना है कि कानून को बिना समाज और जनता की सहमति के लागू करना देश में सामाजिक तनाव और विभाजन को बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को कानून को तुरंत वापस लेना चाहिए और समाज की सांस्कृतिक एकता और शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका यह संदेश सिर्फ प्रशासनिक कदमों के बारे में नहीं, बल्कि समाज में समरसता और सामाजिक न्याय को बनाए रखने के लिए भी है।

”सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा”

रामभद्राचार्य ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहे और सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा सुनिश्चित करना उनका आदर्श रहा है। उन्होंने वशिष्ठ नगर की अध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को भी उजागर किया। उनका मानना है कि UGC कानून लागू होने से जो असंतुलन और सामाजिक भेदभाव पैदा होगा, उसे रोकने के लिए कानून की वापसी अनिवार्य है।

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