back to top
30.1 C
New Delhi
Wednesday, March 25, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

आतंकी कसाब को भी दिया गया निष्पक्ष सुनवाई का मौका, यासीन मलिक मामले में SC ने क्यों कहा ऐसा ?

SC ने यासीन मलिक की कोर्ट में उपस्थिति के खिलाफ CBI की याचिका पर सवाल उठाया

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल आतंकवादी अजमल कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया। यह बयान तब आया जब शीर्ष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई की। सीबीआई की अपील में जम्मू की एक अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दो महत्वपूर्ण मामलों में कार्यवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।

यासीन मलिक दोनों मामलों में मुख्य आरोपी है

विचाराधीन दो मामले 1990 में श्रीनगर के पास भारतीय वायुसेना के चार कर्मियों की हत्या और 1989 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण शामिल है। यासीन मलिक दोनों मामलों में मुख्य आरोपी है। सीबीआई ने सुरक्षा संबंधी चिंता जताई और मलिक को व्यक्तिगत रूप से पेश करने के जम्मू कोर्ट के निर्देश पर आपत्ति जताई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ को सूचित किया कि कश्मीरी अलगाववादी को दिल्ली की तिहाड़ जेल से जम्मू ले जाना संभव नहीं होगा। उन्होंने गवाहों की सुरक्षा के बारे में भी चिंता जताई। 

न्यायमूर्ति ओका ने की ये टिप्पणी

न्यायमूर्ति ओका ने टिप्पणी की, “यहां तक ​की अजमल कसाब को भी हमारे देश में निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था,” क्योंकि उन्होंने सॉलिसिटर जनरल (SG) को मामले में गवाहों की संख्या के बारे में विवरण प्राप्त करने का निर्देश दिया था। एसजी ने समझाया कि यह मलिक ही थे जो कानूनी प्रतिनिधित्व से इनकार कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि गवाहों को सुरक्षा की आवश्यकता होगी, उन्होंने एक घटना का हवाला दिया जिसमें एक गवाह की हत्या कर दी गई थी। न्यायमूर्ति ओका ने जेल में सुनवाई आयोजित करने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मामले में सभी आरोपी व्यक्तियों को निर्णय लेने से पहले सुना जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) ने बताया कि आरोपियों में से एक मलिक ने मौजूदा याचिका में वकील नहीं रखा है। एसजी मेहता ने यह भी बताया कि मलिक, जो एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, पहले भी सुप्रीम कोर्ट में शारीरिक रूप से पेश हुआ था, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएँ पैदा हुई थीं।

जवाब में न्यायमूर्ति ओका ने प्रस्ताव दिया कि मलिक को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में वर्चुअल रूप से भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है। मामले को अंततः अगले गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया ताकि सीबीआई को याचिका में संशोधन करने और सभी आरोपियों को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का समय मिल सके।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

IPL Orange Cap: इन 3 दिग्गज बल्लेबाजों का रहा दबदबा, जानिए किसने कितनी बार जीता खिताब

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। IPL Orange Cap उस बल्लेबाज को...

Harish Rana Death: पंचतत्व में विलीन हुए इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा, 13 साल कोमा में रहने के बाद हुआ था निधन

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय इतिहास में पहली बार इच्छामृत्यु...

Ranveer Singh की Dhurandhar 2 की आंधी का जलवा बरकरार, छठवें दिन भी किया बढ़िया कलेक्शन

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। रणवीर सिंह Ranveer Singh की...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵