नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में सुरंग के गिरे हिस्से में फंसे 8 श्रमिकों को बचाने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय एजेंसियां लगातार प्रयासरत हैं। सिलक्यारा सुरंग बचाव दल के सदस्य भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हो गए हैं। बचाव कार्य में मलबा और पानी बाधा बन रहे हैं। शनिवार को हुए इस हादसे के बाद से ही राज्य सरकार समेत केंद्र सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कांग्रेस शासित राज्य होने के नाते राहुल गांधी ने भी CM रेवंत रेड्डी से करीब 20 मिनट तक इस घटना की जानकारी ली।
सिलक्यारा टनल हादसे के रक्षक में बचाव अभियान में जुटे
शनिवार को सुरंग में फंसे 8 श्रमिकों को बाहर निकालने की कोशिश लगातार की जा रही हैं। अब इस बचाव अभियान में उन 6 जीवन रक्षकों को उतारा गया है जिन्होंने साल 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा टनल हादसे में 17 दिन के बाद 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकाला था। उम्मीद की जा रही है कि उत्तराखंड का करिश्मा एक बार फिर दोहराया जाएगा। हालांकि ऑपरेशन में सबसे ज्यादा परेशानी पानी और गाद की वजह से हो रही है। रविवार की रात तक वहां फंसे हुए किसी भी श्रमिक से संपंर्क नहीं हो पाया है। हालांकि बचाव दल सुरंग के अंदर 13.5 किमी पर स्लैब के ढहने वाली जगह के ठीक बाहर तैनात हैं।
श्रमिको की पहुंच से केवल 5-10 मीटर दूर बचाव दल
सिंचाई विभाग के एक अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार जहां श्रमिक फंसे हुए हैं बचाव दल उनसे केवल 5 से 10 मीटर की दूरी पर ही है। तेलंगाना सरकार ने अब उत्तराखंड से रैट माइनर्स की टीम को बुलाया है बाकी बचा मलबा हटाकर श्रमिकों को सकुशल बाहर लाने का कारनामा दोहरा सकती है। हालांकि तेलंगाना सरकार के मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने कहा कि चूंकि श्रमिकों से किसी प्रकार का संपंर्क नहीं हो पा रहा है तो उनके बचने का आशंका कम है लेकिन सरकार अपनी भरपूर कोशिश में जी जान से जुटी है।





