नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। तिरुपति लड्डू विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। देश की सर्वोच न्यायालय ने 30 सितंबर 2024 को तिरुपति लड्डू विवाद की सुनवाई के दौरान कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोगों को भगवान को राजनीति से दूर रखना चाहिए। दरअसल तिरुपति लड्डू को बनाने में प्रयोग किए जाने वाले घी में जानवर की चर्बी के प्रयोग के दावे को लेकर दायर की गई याचिकाओं की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
जस्टिस गवई और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच कर रही सुनवाई
सुप्रीम में दायर की गई याचिकाओं में याचिकाकर्ता डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी, विक्रम सेठ, वाईबी सुब्बा रेड्डी और दुष्यंत श्रीधर का नाम शामिल है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ कर रही है।
आपको प्रेस के पास जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से तिरुपति लड्डू विवाद को लेकर सवाल किया कि लैब रिपोर्ट से ही संकेत मिले कि जिस घी के सैंपल की लैब में जांच हुई थी वो घी रिजेक्ट किया हुआ था। इसके बाद सर्वोच न्यायालय ने आंध्र प्रदेश सरकार से कहा कि जब इस मामले की जांच गठित SIT कर रही है, तो आपको प्रेस के पास जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से सवाल किया कि क्या तिरुपति मंदिर के प्रसाद में रिजेक्ट किए गए घी का प्रयोग किया जा रहा था।
आप लोगों को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए
आंध्र प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इस मामले की जांच जारी है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब इस मामले की जांच जारी है तो आपको तुरंत प्रेस के पास जाने की क्या जरूरत थी? सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से कहा कि आप लोगों को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से कहा कि क्या आपके पास इस बात के सबूत हैं कि तिरुपति लड्डू में प्रयोग किया जा रहा घी खराब था? सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल का जवाब आंध्र प्रदेश की तरफ से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दिया। वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि प्रसाद(तिरुपति लड्डू) के स्वाद को लेकर लोगों की शिकायत आ रही थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनता को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी, आपने यह बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात का कोई भी सबूत नहीं है कि रिजेक्ट किए हुए घी का इस्तेमाल तिरुपति मंदिर के प्रसाद तिरुपति लड्डू में हुआ था।





