नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार के डॉक्टरों को नाइट शिफ्ट ना दिए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट का कहना है कि महिलाओं को सुरक्षा की जरूरत है रिआयत की जरूरत नहीं है। दरअसल सरकार ने आर जी कर मेडिकल कॉलेज में नाइट शिफ्ट के दौरान ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप और मर्डर की घटना के बाद महिलाओं को नाइट शिफ्ट नहीं देने का फैसला किया था।
महिलाओं को रिआयत की जरूरत नहीं है: चीफ जस्टिस
सुप्रीम कोर्ट में suo moto के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूण ने बंगाल सरकार के वकील कपिल सिब्बल से कहा कि क्यों बंगाल सरकार महिला डॉक्टरों को सीमित करना चाहती है। आप कैसे कह सकते हैं कि महिलाएं रात को काम नहीं कर सकती हैं। उन्हें रिआयत की जरूरत नहीं है। वो सेम शिफ्ट में काम कर सकती हैं।
महिलाओं को सीमा में नहीं बांधा जा सकता: जस्टिस
चंद्रचूण ने कहा कि इस समस्या का हल है कि महिलाओं को प्रॉपर सुरक्षा मुहैया कराई जाए। यह आपकी जिम्मेदारी है। आप महिलाओं को सीमा में नहीं बांध सकते हैं। महिला पायलट और सेना कर्मी रात को काम करती हैं।
विकिपीडिया को पीड़ित महिला का नाम हटाने के आदेश
सुनवाई के दौरान विकिपीडिया से पीड़ित महिला का नाम हटाने के लिए कहा गया है। बता दें कि, 36 घंटे की कठिन शिफ्ट के बीच महिला अस्पताल के सेमिनार रूम में सोने चली गई थी। 9 अगस्त की सुबह उसके साथ रेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में पुलिस ने संजय रॉय नाम के सिविक वालंटियर को गिरफ्तार किया है। बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। हजारों जूनियर डॉक्टर इस जघन्य अपराध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच सोमवार को समझौता हो गया। उन्होंने डॉक्टरों की मुख्य मांग – पुलिस आयोग, एक डीसीपी और दो वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को हटाने की अनुमति दे दी। हालांकि, वह स्वास्थ्य सचिव को हटाने पर सहमत नहीं हुईं।




