नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति को मुआवजा देने के लिए उम्र की पहचान करने के लिए आधार कार्ड को स्वीकार कर लिया गया था।
स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट से उम्र की पहचान होनी चाहिए- SC
एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय करोल और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बैंच ने कहा कि मृतक की उम्र किशोर न्याय अधिनियम (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) 2015 की धारा 94 के तहत स्कूल छोड़ने वाले प्रमाण पत्र में दिए गए जन्मतिथि से उम्र की पहचान होनी चाहिए।
आधार कार्ड का इस्तमाल केवल पहचान के लिए होता है
जजों की बैंच ने बताया कि UIDAI ने एक परिपत्र के जरिए I&B मंत्रालय को बताया था कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान के लिए किया जा सकता है मगर आधार कार्ड जन्म तिथि का प्रमाण नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
2015 में सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई जिसके बाद उसके परिजनों ने याचिका दायर की थी और सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही थी। MSCT, रोहतक ने 19.35 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने इस मुआवजे को घटाकर 9.23 लाख रुपये कर दिया क्योंकि हाई कोर्ट के अनुसार MSCT ने मुआवजे का निर्धारण करते समय आयु गुणक को गलत तरीके से लागू किया था। जब उम्र के पहचान की बात की गई तो सुप्रीम कोर्ट ने दावेदार-अपीलकर्ताओं के तर्क को स्वीकार किया और मोटर दुर्घटना में MSCT के फैसले को बरकार रखा जिसने मृतक के उम्र की पहचान उसके स्कूल छोड़ने वाले प्रमाणपत्र के आधार पर की थी।
परिजनों की दलील
परिजनों ने दलील दी थी कि हाई कोर्ट ने आधार कार्ड से मृतक की आयु की पहचान में गलती की है क्योंकि अगर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट से उम्र का पता लगाया जाता तो मृत्यु के समय उसकी उम्र 45 साल थी।




