back to top
20.1 C
New Delhi
Monday, March 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार का कानून किया रद्द, प्राइवेट स्कूलों में EWS बच्चों को मिलेगा आरक्षण

सरकारी स्कूल घर के पास होने पर EWS कोटा के तहत प्राइवेट स्कूल में दाखिला ले सकते हैं या नहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि EWS कोटा के तहत स्कूल में दाखिला देने से मना नहीं कर सकते।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूजः महाराष्ट्र सरकार की 9 फरवरी की अधिसूचना को निरस्त करने वाले मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को लेकर आज SC में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को रद्द कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि EWS वर्ग के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। EWS कोटा के तहत स्कूल में दाखिला देने से मना नहीं कर सकते और आर्थिक रुप से कमजोर बच्चों को भी समान शिक्षा का अधिकार है और इसके लिए प्राइवेट स्कूलों को आरक्षित सीटों पर प्रवेश देना अनिवार्य है।  

दरअसल शिक्षा का अधिकार 2009 (RTE) संशोधन के तहत स्कूलों को कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों के दाखिले के लिए 25% आरक्षण दिया गया था। मगर महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के 1 किलोमीटर के भीतर स्थित निजी स्कूलों को कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए दाखिले के लिए सीट आरक्षण को रद्द कर दिया था।

जजो की बैठक

इस संशोधन के जरिए महाराष्ट्र सरकार ने निजी स्कूलों को 25% कोटा देने से छूट दी थी, जो आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों (EWS) के बच्चों को कक्षा 1 या प्री-स्कूल में एडमिशन देता है, यदि उस निजी स्कूल के 1 किमी दायरे में एक सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल हो। 

मुख्य न्यायाधीश DY chandrachud, न्यायमूर्ती JB Pardiwala और न्यायमूर्ती मनोज मिश्रा की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पास में एक सरकारी स्कूल होने को मतलब यह नहीं कि EWS के बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ने का मौका नहीं मिलना चाहिए। 

मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने समावेशी शिक्षा का समर्थन करते हुए कहा कि संपन्न परिवारों के बच्चे अकसर सुरक्षित घेरे में रहते हैं। 

उन्होंने जोर दिया कि अगर निजी स्कूलों में अलग-अलग आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चे साथ पढ़ते हैं, तो इससे सभी को बेहतर शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब संपन्न परिवारों के बच्चे वंचित बच्चों के साथ पढ़ते है तो उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों की वास्तविकताओं और संघर्षो को समझने का मौका मिलता है। 

एकसाथ सभी वर्ग के बच्चों को पढ़ने से अपने देश को समझने का मिलता है मौका

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि संपन्न परिवारों के बच्चे अक्सर विलासिता में जीते हैं और वास्तविक जीवन की चुनौतियों से दूर रहते हैं। लेकिन जब वे वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों के साथ पढ़ते है, तो उन्हें अपने देश की सच्चाईयों को समझने का मौका मिलता है।  

अन्य खबरों के लिए क्लिक करें- https://raftaar.in/

Advertisementspot_img

Also Read:

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT कंटेंट पर जताई थी आपत्ति, CJI ने बताई साजिश, 11 मार्च को होगी सुनवाई

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एक पुस्तक में न्यायपालिका को लेकर प्रकाशित कथित आपत्तिजनक सामग्री पर कड़ा रुख...
spot_img

Latest Stories

Amitabh Bachchan ने सोशल मीडिया पर किया ऐसा ट्वीट, फैंस में मचा तहलका

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल...

बंगाल से राज्यसभा की दौड़ में नई एंट्री, ममता बनर्जी ने किया नॉमिनेट, आखिर कौन हैं कोयल मल्लिक?

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की...

The Kerala Story 2 Day 1 Collection: कंट्रोवर्सी के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत ओपनिंग

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कोर्ट केस और सियासी विवादों के...

तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026...