नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोलकाता रेप और मर्डर मामले में सुनवाई की। इस दौरान SC ने ममता बनर्जी सरकार, पुलिस और अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। मामले की सुनवाई CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने की। इस दौरान उन्होंने इस रेप व हत्या मामले में लापरवाही बरतने और कवरअप पर बंगाल सरकार और पुलिस को कटघरे में खड़ा किया।
CBI को गुरुवार तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करते हुए CBI को गुरुवार तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इस टास्क फोर्स का काम ये है कि ये कार्यस्थल पर डॉक्टरों की सुरक्षा पर विचार करेगी। इसमें डॉक्टर भी शामिल होंगे। जो सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे देश में अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों से हमें अवगत कराएंगे।
टास्क फोर्स में ये लोग हैं शामिल
- सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, महानिदेशक चिकित्सा सेवाएं (नौसेना).
- डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी.
- डॉ. एम श्रीनिवास, एम्स दिल्ली निदेशक
- डॉ. प्रतिमा मूर्ति, NIMHANS बेंगलुरु
- डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी, एम्स जोधपुर
- डॉ. सौमित्र रावत, सदस्य गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली
- प्रोफेसर अनीता सक्सेना, कुलपति
- डॉ. पल्लवी सैपले, जेजे ग्रुप अस्पताल
- डॉ. पद्मा श्रीवास्तव, चेयरपर्सन न्यूरोलॉजी, पारस हॉस्पिटल गुरुग्राम
क्या है मामला ?
बता दें कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में एक ट्रेनी डॉक्टर का शव बरामद किया गया था। जब शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला कि डॉक्टर के साथ रेप किया गया है और उसकी दर्दनाक तरीके से हत्या की गई है। ट्रेनी डॉक्टर के दोनों आंखों से खून निकल रहा था। इसके अलावा उसके सीना, पैर पर भी चोट के निशान थे। वहीं उसके प्राइवेट पार्ट से भी खून निकल रहा था। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी संजय रॉय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस घटना के बाद डॉक्टरों में रोष फैल गया। आरजी कर अस्पताल से लेकर पूरे देश के डॉक्टरों ने इस मामले के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों ने कोलकाता पुलिस पर सबूत मिटाने और मुख्य आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया था। विरोध को बढ़ता देख कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस केस को CBI को ट्रांसफर कर दिया। फिलहाल CBI को सबसे ज्यादा शक उस कॉलेज के प्रिंसिपल से है। जिसने घटना के तुरंत बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
पश्चिम बंगाल सरकार से पूछे ये सवाल
इस संबंध में आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान SC ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा कि प्रिंसिपल को दूसरे कॉलेज में क्यों जॉइन कराया गया? क्या प्रिंसिपल ने हत्या को आत्महत्या बताया था ? क्या पीड़िता के माता पिता को देर से सूचना दी गई। क्या उन्हें अपनी बेटी के शव को नहीं देखने दिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सकों को सुरक्षा कौन देगा? इसपर केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि डॉक्टरों को सुरक्षा CISF देगी। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RG Kar अस्पताल की सुरक्षा CISF को सौंपनी चाहिये क्योंकि बंगाल पुलिस उनकी सुरक्षा करने में असमर्थ है।
अस्पताल प्रशासन से क्या सवाल किए ?
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और अस्पताल प्रशासन को आज जमकर फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जब ये हत्या हुई थी तो उस समय पीड़िता के पैरेंट्स वहां मौजूद नहीं थे। इसलिए ये अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि इस मामले में FIR अस्पताल प्रशासन कराए। उन्होंने पूछा कि केस इतनी देर से क्यों दर्ज हुई। अस्पताल प्रशासन ने ये निर्णय क्यों नहीं लिया? उस समय प्रिंसिपल क्या कर रहे थे?
पुलिस से क्या पूछे सवाल ?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप व हत्या मामले में पश्चिम बंगाल की पुलिस को भी खूब फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जब मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो पुलिस ने FIR क्यों नहीं दर्ज की। पुलिस कर क्या रही थी? वहीं घटना के बाद उपद्रवियों ने अस्पताल में घुसकर तोड़फोड़ की। उस समय पुलिस कहां थी? उपद्रवियों को अस्पताल में किसने घुसने दिया? पुलिस ने क्राइम सीन को क्यों नहीं प्रोटेक्ट किया? इसपर पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि उस समय 150 पुलिस वाले वहां मौजूद थे। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस को खुद पर उठ रहे सवालों को काफी गंभीरता से लेना चाहिये।
हड़ताल कर रहे चिकित्सकों से CJI ने की अपील
वहीं मामले को लेकर हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से CJI ने कहा कि आप हमपर भरोसा करें। इस बात को समझें कि उनके पास पूरे देश का हेल्थ केयर सिस्टम है। हम आग्रह करते हैं कि वो काम पर लौटें। हम आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां हैं। हम इस मामले को हाईकोर्ट के लिए नहीं छोड़ेंगे। ये राष्ट्रहित का मसला है।





