नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कोलकाता के RG Kar Medical College केस की मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस DY Chandrachud की अगुवाई में सुनवाई की गई। इस दौरान कई प्रमुख बातों पर बात हुई। इस पूरी कार्यवाही के कुछ प्रमुख अंश पढ़िए यहां…
इस घटना के बाद हम और रेप की घटनाओं का इंतजार नहीं कर सकते : कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा है कि राष्ट्र चीजें बदलने के लिए अगली रेप की घटना का इंतजार नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए जो नियम बनाए गए हैं वो पर्याप्त नहीं हैं और उनमें कुछ बदलाव किए जाने चाहिए।
इस मामले में 50 FIR दर्ज की गई
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि अस्पताल में भीड़ की बर्बरता के कारण 50 FIR दर्ज की गई। इस मामले में 37 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह केवल ‘रेसिपी’ थी जांच नहीं थी। कोर्ट ने कोलकाता सरकार को आदेश दिए हैं कि अस्पताल में भीड़ ने जो तोड़फोड़ की है उससे संबंधित रिपोर्ट 22 अगस्त तक जमा कराएं।
सोशल मीडिया ने स्थिति को और खराब किया: कपिल सिब्बल
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मामले को लेकर कहा है कि सोशल मीडिया ने स्थिति को और खराब कर दिया है। उन्होंने कहा कि केस से संबंधित जो कुछ भी कहा जा रहा है वो सरासर गलत है और इस मामले को इस तरह से पेश हीं किया जाना चाहिए था।
मामले की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया
इस मामले की जांच के लिए नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया गया है जो मामले में 3 हफ्ते के भीतर पहली रिपोर्ट और फाइनल रिपोर्ट 3 महीने में जमा कराएगी।
सुनवाई के दौरान क्या सवाल उठाए गए
कोर्ट में सुनवाई को दौरान ये सवाल उठाया गया कि कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का ट्रांसफर इस समय में क्यों किया गया? सेमिनार हॉल में जहां पीड़िता की बॉडी मिली थी वहां पर रेनोवेशन का काम क्यों कराया गया? भीड़ को काबू करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
सुप्रीम कोर्ट ने टाक्स फोर्स से कहा कि सभी मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए पॉश एक्ट लगाया जाए
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि एक 10 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। डॉक्टर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पॉश एक्ट सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम और प्राइवेट हेल्थ केयर अस्पतालों में लागू किया जाए। यह एक्ट केवल डॉक्टर्स के लिए नहीं बल्कि जूनियर डॉक्टर्स इंटर्न्स, ट्रेनी डॉक्टरों पर भी लागू किया जाए।
डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की गई
डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की गई है। उनसे कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवाएं सफर कर रही हैं इस कारण से अपनी हड़ताल को खत्म कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि आप लोगों की सुरक्षा के लिए हम बैठे हैं तो हड़ताल खत्म कर दी जाए। उनकी सुरक्षा चिंता का मुद्दा है।
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