नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली में हर साल अक्टूबर के महीने में पराली का धुआं एक बड़ी आफत बन जाता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग(CAQM) के अनुसार पिछले चार वर्षों के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी आई है। लेकिन हरियाणा और पंजाब के कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां पर पराली जलाने की घटनाओं में नियंत्रण नहीं हो पाया है। जिस पर नियंत्रण पाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अपनी पूरी योजना बना रहा है।
पराली जलाने की घटनाओं में 50 प्रतिशत से अधिक कमी आई है
CAQM के अनुसार वर्ष 2020 में पराली जलाने की 87,632 घटनाएं दर्ज हुई थी, जो वर्ष 2021 में घटकर 78,550 हो गई थी। वर्ष 2022 में पराली जलाने की 53,792 घटनाएं दर्ज की गई थी। वर्ष 2023 में यह घटनाएं घटकर 39,186 दर्ज की गई। CAQM के अनुसार वर्ष 2020 से पराली जलाने की घटनाओं में 50 प्रतिशत से अधिक कमी आई है।
पराली की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी रखी जा रही है
CAQM के वर्ष 2022 और 2023 के आकड़ों के अनुसार पंजाब के 3 और हरियाणा के 5 जिलों में वर्ष 2023 में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि हुई थी। जिन जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई थी, इसमें पंजाब के पठानकोट, सास नगर और अमृतसर शामिल है। वहीं हरियाणा में भिवानी, रोहतक, झज्झर, फरीदाबाद और पलवल जिलों का नाम शामिल है।
CAQM के अनुसार इन 8 जिलों में पराली की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही आयोग लोगों को पराली प्रबंधन की जानकारी देकर जागरूक भी रहा है और पराली जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की भी तैयारी कर रहा है। CAQM की पूरी तैयारी है कि इस वर्ष से पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया जाए। क्योंकि पराली को जलाने की वजह से दिल्ली में सांस लेने में भी एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है। पराली के प्रदुषण की वजह से दिल्ली में लोगों का घर से बाहर निकलना किसी खतरे से खाली नहीं होता है।





