नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के बाहर लंबे समय से फैले अतिक्रमण पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी को दो महीने के भीतर पूरे इलाके का सर्वे कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय के इस आदेश के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में जामा मस्जिद क्षेत्र में भी बुलडोजर की कार्रवाई हो सकती है।
जामा मस्जिद पूरे देश की एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन धरोहर है
गौरतलब है कि जामा मस्जिद पूरे देश की एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन धरोहर है। मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा सत्रहवीं सदी में बनवाई गई यह मस्जिद रोजाना हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है, पर ये भी हकीकत है कि बीते कई वर्षों से मस्जिद तक पहुंचने वाली सड़कों, आसपास के फुटपाथों और यहां तक कि मस्जिद की सीढ़ियों तक पर पटरी दुकानदारों और ठेलों का कब्जा बना हुआ है। इससे यातायात बाधित होने के साथ ही ऐतिहासिक इमारत की भव्यता भी प्रभावित हो रही है।
अवैध दुकानों और ठेलों के कारण रास्ते बेहद संकरे हो गए हैं
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया कि अतिक्रमण का दायरा अब मौलाना अबुल कलाम आजाद की मजार तक फैल चुका है। देश के पहले शिक्षा मंत्री की यह मजार राष्ट्रीय महत्व की धरोहर है, लेकिन इसके आसपास अवैध दुकानों और ठेलों के कारण रास्ते बेहद संकरे हो गए हैं। इससे आम लोगों के साथ साथ एंबुलेंस और दमकल वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है। कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए एमसीडी को साफ निर्देश दिया कि सर्वे के बाद कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
कई वीडियो फुटेज की जांच जारी है
आपको बता दें कि यह आदेश ऐसे समय आया है, जब हाल ही में तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। ‘फैज ए इलाही मस्जिद’ और ‘कब्रिस्तान’ के पास हुई कार्रवाई के दौरान पथराव हुआ, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई वीडियो फुटेज की जांच जारी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिम्मेदारी एमसीडी पर है
दूसरी ओर तुर्कमान गेट की घटना के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुछ दल इसमें सख्ती की जरूरत बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे रोजी रोटी पर हमला करार दे रहे हैं। जामा मस्जिद क्षेत्र के स्थानीय दुकानदारों में भी चिंता है। उनका कहना है कि यदि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के कार्रवाई होने से उनका रोजगार खतरे में पड़ जाएगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिम्मेदारी एमसीडी पर है।




