नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । शिवसेना को तोड़कर महायुति गठबंधन की सरकार बनी थी। उसे सरकार चलाने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सत्तारुढ़ गठबंधन में कौन नेता, मंत्री कब रुठ जाए किसी पर भरोसा नही। क्योंकि महाराष्ट्र का राजनीतिक इतिहास उथल-पुथल का ही रहा है। आजकल महायुति के अंदर भी कुछ ऐसे ही देखने को मिल रहा है। गठबंधन के दोनों दल शिवसेना ओर बीजेपी में खींचतान की खबरें आई है। इसको लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।
दरअसल, 2027 में नासिक में होने वाल कुंभ मेले को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बैठक की थी, जिसमें डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को भी बुलाया गया था, लेकिन शिंदे इस मीटिंग में नहीं पहुंचे। इस बैठक के दो दिन बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को नासिक का दौरा किया और कुंभ मेले के लिए एक अलग समीक्षा बैठक की, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों के बीच दरार की अटकलें तेज हो गईं।
हालांकि, इस तरह की खबरों के बीच शिवसेना चीफ और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि, उन्होंने समीक्षा बैठक इसलिए की, क्योंकि वह पार्टी की रैली के लिए नासिक में थे। उन्होंने कहा कि महायुति गठबंधन में कोई दरार नहीं है। सब कुछ सही चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि, नासिक और रायगढ़ के संरक्षक मंत्री पद का मुद्दा जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
नासिक के संरक्षक मंत्री पद के लिए खींचतान
इससे पहले भी दो मंत्रियों के बीच टकराव की खबरें चली थी, ये तब हुआ जब मंत्री गिरीश महाजन ने नासिक में एक बैठक बुलाई थी इस बैठक में शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के मंत्री दादा भुसे बैठक में शामिल नहीं हुए थे। शिवसेना के मंत्री दादा भुसे नासिक के संरक्षक मंत्री पद के दावेदार थे। वो इस पद पर रहने के लिए काफी उत्सुक हैं, नासिक के संरक्षक मंत्री पद को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन, खासकर दादा भुसे और गिरीश महाजन के बीच खींचतान चल रही है। इस पद के लिए दोनो ही दल शिवसेना और भाजपा अपना अपना दावा कर रहे हैं। 2027 में नासिक में कुंभ मेला आयोजित किया जाएगा। ऐसे में यह पद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मीडिया से बातचीत में गिरीश महाजन ने कहा कि, उन्हें शिंदे द्वारा बुलाई गई बैठक में आमंत्रित किया गया था।
शिंदे ने इस संबंध में बैठक की तो क्या गलत है?
महाजन ने आगे कहा कि, सीएम साहेब ने भी इस संबंध में एक मीटिंग बुलाई थी, लेकिन मै उसमें पहुंच नही सका। कुंभ मेला के इस आयोजन में सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए, अगर शिंदे ने इस संबंध में बैठक की तो क्या गलत है? दादा भुसे ने भी कुंभ मेले को लेकर एक विस्तृत बैठक की। मुझे नहीं बुलाया गया न ही इसका कारण बताया गया। इस बार कुंभ मेले का आयोजन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम बैठकें करें और अधिकारियों से तैयारियों के बारे में अपडेट लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन दलों या नेताओं के बीच कोई मतभेद नहीं है।





