सिंगरौली, 20 मार्च (हि.स.)। कोयला घोटाले की आशंका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) ने सिंगरौली जिले में नार्दन कोल फील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के अमलोरी प्रोजेक्ट में छापामार कार्रवाई की है। सीबीआई और सीएमपीडीआई के विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें शनिवार सुबह 9 बजे प्रोजेक्ट पर पहुंची और अमरौली प्रोजेक्ट के अलग-अलग जगहों पर एक साथ छापामार कार्रवाई शुरू की। इसमें पुराने जीएम ऑफिस के पास स्थित स्टोर, सीएचपी के पास सेल्स डिपार्टमेंट के दफ्तर, कोल स्टॉक सेक्शन के दफ्तर और कोयला के नापतौल करने वाले कांटा (वे-ब्रिज) शामिल है, जहां टीम की कार्रवाई चल रही है। सीबीआई और सीएमपीडीआई की यह कार्रवाई इतनी गोपनीय रही कि प्रोजेक्ट के कर्मचारियों तक को काफी देर बाद इस छापे की जानकारी नहीं मिल पाई। कार्यालय में पहुंचते ही जांच टीम के हर सदस्य ने सभी प्रकार की गतिविधियों को अपने नियंत्रण में ले लिया। टीम के सदस्य दस्तावेजों की छानबीन में जुटे हुए हैं और जिम्मेदार लोगों से पूछताछ भी कर रहे हैं, हालांकि, अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन बताया जा रहा है कि कोयला घोटाले के संबंध में यह छापामार कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी के अंदर कोयला घोटाले का खेल चल रहा है, जिसकी जानकारी सीबीआई को हुई। सीटीआई टीम द्वारा कंपनी की गतिविधि पर नजर रखी गई और गड़बड़ी की आशंका पुख्ता होने के बाद यह शनिवार को छापामार कार्रवाई की गई। सीबीआई और सीएमपीडीआई के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गुपचुप तरीके अमरोली प्रोजेक्ट पहुंची और दस्तावेजों की छानबीन शुरू की। फिलहाल कार्रवाई जारी है। बताया गया है कि 31 मार्च तक एनसीएल को 113 टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य है। इसी के चलते एनसीएल के सभी प्रोजेक्ट्स के बीच होड़ मची हुई है। जहां प्रोडक्शन को बढ़ा चढ़ाकर दिखाए जाने की आशंका है। सूत्रों की मानें तो प्रोजेक्ट में कोयले की हेराफेरी का खेल काफी लम्बे समय से चल रहा था। इस हेराफेरी में कोयले का बड़ा स्टॉक अवैध तरीके से प्रोजेक्ट के बाहर भेजने या फिर अन्य किसी तरीके से भी कोयले के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही से कोलयार्ड से कोयले का काफी बड़ा स्टॉक खराब गया है, जिससे कोयले के प्रोडक्शन और डिस्पैच में बड़ा अंतर दिख रहा है। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश/राजू




