नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन चुनाव से पहले ही सूबे में राजनीति अपने चरम पर पहुंच चुकी है। एक तरफ जहां विपक्षी गठबंधन (MVA) नई-नई रणनीति बनाकर सरकार को घेरने में जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में सरकार चला रही महायुति गठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है।
NCP और शिवसेना के बीच हुआ घमासान
दरअसल महाराष्ट्र सरकार के द्वारा लाई गई योजना ‘लड़की बहन योजना’ का क्रेडिट लेने को लेकर CM एकनाथ शिंदे और NCP (अजित पवार) की पार्टी में घमासान हो गया है। शिवसेना के एक मंत्री ने लड़की बहन योजना के विज्ञापन से सीएम एकनाथ शिंदे का चेहरा हटाने को लेकर एनसीपी पर नाराजगी जताई है। दोनों पक्षों के बीच तल्खी इतनी बढ़ गई कि इसे शांत करने के लिए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रचार के लिए SOP लाना पड़ा।
पोस्टर के नाम पर महायुति गठबंधन में बढ़ी तल्खी
बता दें कि, कुछ दिनों पहले ही ‘लड़की बहन योजना‘ के शुरू होने के बाद NCP ने महाराष्ट्र के कई शहरों में अजित दादा लड़की बहन योजना नाम के पोस्टर लगा दिए। जिसके बाद एसे पोस्टर बारामती में भी लगाए गए। जिसमें अजित पवार का नाम नहीं था। अब पोस्टर पर नाम को लेकर महायुति गठबंधन में तल्खी देखने को मिल रही है।
तल्खी को कम करने के लिए बुलाई गई मीटिंग
दोनों पार्टियों के बीच बढ़ते तल्खी को देखते हुए कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई। जिसमें शिवसेना मंत्री शंभुराज देसाई ने NCP को घेरते हुए पूछा कि पोस्टर से सीएम का नाम क्यों गायब हुआ? देसाई ने कहा कि जब उनकी पार्ट प्रचार करती है तो उसमें दोनों उपमुख्यमंत्रियों के नाम होते हैं, लेकिन जब NCP की बारी आई तो उन्होंने सीएम को ही हटा दिया। जिसपर एनसीपी ने कहा कि यह केवल नाम छोटा करने के लिए सीएम नहीं लिखा गया है।
डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एसओपी किया जारी
जानकारी के मुताबिक नाम को लेकर दोनों पार्टियों के नेताओं में बहस को बढ़ता देख डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बीच-बचाव किया। फडणवीस ने इस योजना के प्रचार के लिए एसओपी जारी करने का प्रस्ताव लाया। अब पूरे राज्य में सिर्फ एक ही तरह के विज्ञापन चलेंगे।





