नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई है। मौनी अमावस्या के दिन से ही धरने पर बैठे शंकराचार्य बीते छह दिनों से लगातार विरोध कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें बुखार आ गया है, जिसके चलते वह फिलहाल अपनी वैन में आराम कर रहे हैं।
दिन में सिर्फ दो बार पालकी पर आए
जानकारी के अनुसार, तबीयत खराब होने के कारण शंकराचार्य दिन में केवल दो बार ही पालकी पर बाहर आए। इसके बाद वह फिर वैन में लौट गए। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन के रवैये से नाराज़ शंकराचार्य अब तक अपने शिविर में वापस नहीं लौटे हैं और धरना जारी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन उन्हें पालकी में संगम स्नान से रोका गया और इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की गई। इसी बात से आहत होकर उन्होंने धरना शुरू किया। शंकराचार्य ने साफ कहा है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक वह वसंत पंचमी का स्नान नहीं करेंगे।
सवा लाख शिवलिंग स्थापना पर भी अड़चन
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम में सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना प्रस्तावित है। इससे पहले इन शिवलिंगों को प्रयागराज लाकर जनता के दर्शन और विधिवत पूजन की योजना थी। फिलहाल स्थिति यह है कि कुछ ही शिवलिंग प्रयागराज पहुंच पाए हैं, जबकि बाकी अभी कार्टूनों में पैक हैं। शिविर के भीतर रखे शिवलिंग पूजन की प्रतीक्षा में हैं, जिससे भक्तों में नाराजगी भी देखी जा रही है। इस पूरे विवाद के बीच संत समाज की ओर से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की गई है। नासिक के संत महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि सम्मानजनक संवाद और आपसी समझ से होना चाहिए। फिलहाल, शंकराचार्य की सेहत और धरने को लेकर स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है। प्रशासन और संत समाज की कोशिश है कि बातचीत के जरिए इस विवाद का शांतिपूर्ण हल निकाला जाए।





