नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कैश-फॉर-जॉब घोटाले जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद तमिलनाडु सरकार में सेंथिल बालाजी दोबारा मंत्री में बन गए है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सेंथिल बालाजी को बेल देते वक्त खरी खोटी सुना दी। कोर्ट को आश्चर्य इस बात का हुआ की घोटाले के आरोपी को बेल मिलने के बाद यह सीधे सरकार में जाकर मंत्री बन जाते है जिससे वह रसूख के चलते अपने खिलाफ गवाही दे रहे पीडि़तों को भी प्रभावित कर सकता है और उन पर दबाव भी बनाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने किया सवाल
सेंथिल बालाजी को कथित घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद तमिलनाडु में मंत्री बना दिया गया। सुप्रीम कोर्ट की दो बेंचों के पीठ ने सवाल करते हुए कहा, कि हम आपको जमानत दे है और अगले दिन आप सीधे सरकार में जाकर मंत्री पद संभाल लेते है तो इस तरह से कोई भी यह सोचने के लिए मजबूर होगा कि अब वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के रूप में आप अपने पद को दुरुपयोग करते हुए गवाहों को प्रभावित और उन पर दबाव बना सकते है ।
सुप्रीम कोर्ट 26 सितंबर 2024 के आदेश को रद्द करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत उसने बालाजी को इस आधार पर जमानत दी थी कि रिहाई के बाद बालाजी को मंत्री बनाए जाने के कारण गवाहों पर दबाव होगा।
निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं
SC ने कहा, आशंका यह है कि दूसरे प्रतिवादी के खिलाफ आरोपों की गंभीरता को देखते हुए गवाह दूसरे प्रतिवादी, जो कैबिनेट मंत्री का पद संभाल रहे हैं, उनके खिलाफ गवाही देने की मानसिक स्थिति में नहीं होंगे। यह एकमात्र पहलू है जिस पर प्रथम दृष्टया हम आवेदन पर विचार करने के लिए इच्छुक हैं, और यह स्पष्ट करते हुए कि आवेदन के गुण-दोष और न्यायनिर्णयन के आधार पर निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।




